भउजी हो! का बबुआ? आपन नोटवा भंजा लिहलू कि ना ? हमार नोटवा त कहिये भँज गइल, रउरा अपना कनियवा वाला नोट जल्दी भंजा लीं। का भउजी, तोहरा हमेशा मजाके सुझेला! हम पाँच सौ आ हजरिया नोट का बारे में पूछनी हँ। अरे ओहिजा अबहीं लमहर लमहर लाइन लागत बा।पूरा पढ़ीं…

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भउजी हो ! के ह? केकर भउजी? कइसन भउजी? केंवड़िया खोलबू त देखिए लेबू. जानत बानी कि खिसियाइल बाड़ू. ढेर दिन पर आइल बानी. कनिया आवे के परमिशन दे दिहलसि? अरे ना भउजी, उनकर दोष नइखे. एह घरी हमहीं असकतायाए लागल बानी. नयका सब सुनत नइखन स आ पुरनका लोगपूरा पढ़ीं…

भउजी हो! का बबुआ? काल्हु चौक प एगो आदमी के देखनी जे अगहन में जोगीरा गावत रहुवे. होखी कवनो पागल. अइसनका लोग से दूरे रहे के चाहीं. ठीके कहतारू भउजी. ऊ ससुरा छाती ठोक-ठोक के अपना के हरामजादा साबित करे में लागल रहुवे. कहत रहुवे कि ओकरा नइखे मालूम किपूरा पढ़ीं…

भउजी हो ! अरे बबुआ ! आजु सूरुज केने से उगल रले हँ ? का भउजी, फेर शुरू हो गइलू ? त का करीं ? कतना महीना बाद भउजी याद पड़ली ह, याद बा ? छोड़ ई सब. आजु कुछ अझूराइल सझुरवावे आइल बानी. का ? दिल्ली में सरकार बनावेपूरा पढ़ीं…

भउजी हो ! का बबुआ ? बिहार आ भोजपुरी में का एक जइसन बा ? अपना हक ला घिघियाए के आदत. तनी अउरी साफ करऽ. बिहार के विशेष राज्य के दरजा चाहीं आ भोजपुरी के संविधान के अठवीं अनुसूची में जगहा. दुनू के मालूम बा कि एह बात ला पहिलेपूरा पढ़ीं…

भउजी हो ! – कइसन भउजी, केकर भउजी ? बाप हो, आजु त अगिया बैताल बन गइल बाड़ू. माफ क द. – बुझा गइल आपन गलती ? हँ. बाकिर जवन भइल तवन मजबूरी में. फगुआ में ससुरारी चल गइल रहीं आ ओहिजा नेटवर्के ना रहुवे. -ई बहानेबाजी चलेवाली नइखे. कतनापूरा पढ़ीं…

भउजी हो! का बबुआ ? हई उन्नाव में सरकार सोना खातिर खोदाई काहे करवावत बिया? हम त रउरा के अतना बुड़बक ना बूझत रहीं. ई का? हम तोहरा से सवाल पुछनी त तू हमरा के बूड़बक बतावे लगलू। त रउरे बताईं उन्नाव कहाँ बा? कानपुर का लगे. आ कानपुर मेंपूरा पढ़ीं…

भउजी हो! का बबुआ? ई कांग्रेसिया प्रियंका के नाम सुन के अतना भड़कत काहे बाड़े सँ? भड़के वाली बात बा से भड़कत बाड़े स. बुझनी ना. बूझब कइसे? रउरे सभ के आग लगावल ह. कांग्रेसिया सब बूझत बाड़े. अच्छा मान ल कि प्रियंका राजनिति के मैदान में उतरिए जात बाड़ीपूरा पढ़ीं…

भउजी हो! का बबुआ? शौचालय पहिले कि देवालय? का बाति बा? पेट खराब हो गइल बा का? ना भउजी. राजनीति में एह घरी एही पर बहस चलत बा त सोचनी काहे ना तहरा से पूछीं कि कवन पहिले? ए बबुआ, हम त इहे जनले बानी कि दिशा मैदान, शौच कर्मपूरा पढ़ीं…

भउजी हो! का बबुआ? सोचतानी तोहरा ला एगो पुरस्कार के जोगाड़ करीं. कइसन पुरस्कार? इनामो मिली का ? पुरस्कार के नाम होखी “महान भउजी सम्मान” बाकिर अबहीं कवनो संस्था से सउदा नइखे बन पावत. आ इनाम त खैर का मिली हँ पइसा कम से कम लागो एही फेर में बानी.पूरा पढ़ीं…

भउजी हो! का बबुआ? आदमी कवना बात से अधिका खुश होला? दोसरा के दुख से. ठीक कहलू. आ पोसुआ मीडिया के छाती कब फुलेला? जब केहू मोदी के शिकायत करो भा कुछ मोदी का उलटा होखो. अरे वाह भउजी! तू त आजु कमाल करत बाड़ू. आ कवन बात ह जवनपूरा पढ़ीं…