आजु गणतंत्र दिवस के 74वीं वर्षगाँठ ह. साल 1950 में आजुए का दिन भारत के संविधान लागू भइल रहुवे. ओह दिन जवन संविधान रहल तवना के मूल प्रकृति के कहिए बदल दीहल गइल आ ना त विधायिका में आवाज उठल ना न्यायपालिका में. संविधान के मूल प्रकृति के अभिभावक होखे के दावा करे वाली देश के न्यायपालिका के सर्वोच्च पीठ आपन पीठ अपने से ठोकत रहेले बाकिर उहो कबो एह बदलाव का खिलाफ आवाज ना उठवलसि.

संविधान के मूलप्रति में भगवान राम, उनुका परिवार, उनुका दरबार के चित्र लगावल गइल रहुवे. काहें कि संविधान के निर्माता मानत रहलें कि भगवान राम देश के प्रतीक हउवन आ देश में रामराज्य ले आवे के परिकल्पना पर चलल बहुत जरुरी बा.

दुर्भाग्य से एगो अइसन प्रधानमंत्री मिल गइल देश के जेकरा पक्ष में एको आदमी ना रहल बाकिर चूंकि ऊ मोहनदास के दुलरुवा रहलन से गाँधी अपना प्रभाव के गलत व्यवहार करत जवाहर लाल नेहरू के प्रधानमंत्री बनवा दिहलन. आ ओकरा बाद से जवन घटना-दुर्घटना देश में भइली सँ तवनन का दुष्प्रभाव से देश आ समाज आजु ले मुक्त नइखे हो पावल.

सबसे पहिले त ऊ जान बूझ के देश विभाजन के मूल आधार के लागू ना करवलन. मुसलमान आपन हिस्सा का रुप में पाकिस्तान पा चुकल रहलें आ ओकरा बाद एहिजा रहे के कवनो नैतिक अधिकार ना रहुवे ओह लोगन के. बाकिर जवाहर लाल ओहनी के पूरा संरक्षण दिहलन. देश के शिक्षा मंत्री जान बूझ के मुसलमानन के बनावत गइलें. एही शिक्षा मंत्रियन के प्रभाव से देश के शिक्षा व्यवस्था भारतीय संस्कृति आ सामाजिक व्यवस्था के मिटावत चल गइल. ओकरा बाद कई पीढ़ीयन के एही व्यवस्था में पालन-पोषण, शिक्षा-दीक्षा भइल. देश में बँवारा गिरोह आपन जकड़ अतना मजबूत कर लिहलसि कि हिन्दू भा भारतीयता से जुड़ल हर बात के हिकारत से देखे के आदत बन गइल. देश के माननीय न्यायाधीशो लोग एही शिक्षा व्यवस्था के उपज ह आ ओकरे परिणाम भइल कि देश के न्यायपालिका अइसन राहे चल निकलल जवना के संक्षेप में हिन्दू विरोधी कहल जा सकेला. देश के हिन्दू मंदिरन पर सरकार कब्जा करत गइली सँ आ ओहिजा से मिलल दान के उपयोग हिन्दू विरोधी समुदायन के विकास आ आनन्द खातिर होखत गइल.

एही क्रम में देश के संविधान के मूल प्रति के भण्डार घर में रखवा दीहल गइल आ ओहमें से ऊ सगरी चित्र हटा दीहल गइल जवन भारत के संस्कृति आ भगवान श्रीराम से जुड़ल रहली सँ. हद त तब हो गइल जब आपातकाल का जमाना में देश के तानाशाह इन्दिरा गाँधी संविधान के मूल प्रस्तावना में दू गो शब्द घुसेड़ दिहली – सेकूलर आ सोशलिस्ट. मूल प्रस्तावना में कहल गइल रहुवे – Sovereign Democratic Republic. .एकरा के बदल के Sovereign Socialist Secular Democratic Republic बना दीहल गइल.

देश के दुर्भाग्ये कहल जाई कि एहिजा के बहुसंख्यक समुदाय आज अपना अधिकारन के लड़ाई लड़े ला अभिशप्त बा जबकि देश के संसाधनन पर पहिला अधिकार अल्पसंख्यकन के होखे के बात कहाए लागल.

साल 2014 में पहिला बेर एगो अइसन सरकार आइल जवन हिन्दूवन के बाकी समुदायन का बराबरी पर देखे लागल. बाकिर अबहियों अइसन बहुत कुछ बा जवना से हिन्दूवन के एह देश में दोयम दर्जा के नागरिक बना के राख दीहल गइल बा. राह अतना काँट-कूस से भरल बा कि दस बरीस त एह काँट-कुस के साफे करत में निकल गइल. आशा कइल जाव कि देश के प्रबुद्ध नागरिक खास कर के बहुसंख्यक समुदाय अपना मताधिकार के बहुते सोच समझि के व्यवहार में ले आई. काहें कि अगर एहमें चूक हो गइल त फेर एह देश में हिन्दुवन के कवनो भविष्य ना रह जाई. आ दुनिया में अब एको देश नइखे बाचल जवना के हिन्दू देश कहल जा सके. मुसलमान कहाए वाल 57 गो देश बाड़ी सँ. ईसाई मान्यता वाला देशनो के कमी नइखे.

एहसे एगो पुरान कहाउत दोहा याद राखल जरुरी बा –
चार बाँस चौबीस गज, अंगुल अष्ट प्रमाण, एते प सुलतान है मत चूको चौहान !
अबकी चूक हो गइल त फेरु कवनो राह मुक्ति के ना मिल पाई.

संविधान के मूल स्वभाव के वापसी खातिर कसम खाइल जाव आज एह गणतंत्र दिवस पर.

एह लेख में दीहल गइल दू गो फोटो संविधान से होखला का बावजूद ओकरा मूल अधिकारियन के नाम बतावल जरूरी बा.
संविधान के पहिला पृष्ठ वाला चित्र के लिंक नीचे दीहल जात बा –
By Illumination/ornamentation by Beohar Rammanohar Sinha , calligraphy by Prem Behari Narain Raizada. – https://www.loc.gov/exhibits/world/images/wt0070_1s.jpg Originally from en.wikipedia; description page is/was here.Beohar Rammanohar Sinha illuminated, beautified and decorated the original manuscript calligraphed by Prem Behari Narain Raizada. Beoher Rammanohar Sinha’s legible short-signature in Devanagari-script as Ram on the Preamble-page (lower-right corner within the outermost border-design), and as rammanohar on other pages of the Constitution bear unambiguous testimony to this fact. He was the favorite disciple of Nandalal Bose. After finishing the Constitution, some leftover art-material was carefully preserved by the artist which he bequeathed to his son Beohar Dr Anupam Sinha., Public Domain, https://commons.wikimedia.org/w/index.php?curid=1098021

संविधान में मूल अधिकार वाला पृष्ठ पर भगवान राम, माता सीता, आ भ्राता लक्ष्मण जे के चित्र के लिंक नीचे दीहल जात बा –
https://theprint.in/opinion/why-painting-of-ram-in-indian-constitution-matters/592160/

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कुछ त कहीं......

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