• दयानंद पांडेय

ई कइसन धागा हऽ जवना से अइसन चादर बुन लीहलऽ मुख़्तार अंसारी कि दुनिया के डेरावत-डेरावत अपने डेराए लगलऽ ? पतई लेखा काँपे लगलऽ हाईवे पर? आखिर कइसन जुलाहा हउव, कइसन बुनकर हफव कि अपनही ला फांसी के फंदा बुन लिहलऽ ? ख़ैर, ई बतावऽ कि अब बांदो जेल में पोखरी खोनाई कि ना ? लखनऊ आ गाज़ीपुर जेलन का तरह. डी एम, एस पी तोहरा साथे बैडमिंटन खेले अइहें का बांदा जेल में ? मुलायम, मायावती, आज़म खान कुछ मददो करी लोग ? बाकिर मुलायम ते अपने बेटा औरंगज़ेब का क़ैद में बाड़न. आमदनी से अधिका के संपत्ति मामिला के जांच के क़ैद त अलगे बा. मायावतिओ एही आय से अधिका के संपत्ति का मामिला के जांच का साया में बाड़ी. आ उ जहराह ज़ुबान के मालिक, भारत माता के डाइन बतावे वाला आज़म खान ?

तू पंजाब का जेल में ऐश करे का गइलऽ मुख्तार अंसारी कि ऊ आज़म ख़ान बीवी-बेटा समेत सीतापुर के जेल में एंट्री ले बइठल. अब दंगो-वंगा करवावो के हैसियत नइखे रह गइल मुख़्तार अंसारी तोहरा में. कानपुर के विकास दुबे जइसन मुठभेड़ो नसीब नइखे तोहरा, ना ही मुन्ना बजरंगी जइसन मारल जइबऽ. मरबऽ बाकिर गँवे-गँवे, रिस-रिस के. मरबऽ बाकिर तिल-तिल क के कि जेल में वी आई पी रुतबा म्ल जाव. जवन दुर्गति कबो मायावती करवले रहुवी राजा भईया के कानपुर जेल में, ओहू ले बेसी दुर्गति तोहार होखे वाला बा बांदा जेल में. राजा भईया ते एगो कूलर के ठंडा हवा ला तरस गइल रहलन. कूलर ख़राब भइल त ख़राबे रह गइल, ठीक ना भइल. हो सकेला कि बांदा जेल में तोहार पंखो खराब हो जाव, ठीके ना होव. फेरु बांदा के गरमी के का कहना ! अइसहीं मरबऽ तिल-तिल के आपन जान बचावत. बैरक के भीड़ में लाइन लगा के खाना खात, दिशा-मैदान ला बाथरूम का चौखट पर मूछ अईंठत, आपन बारी जोहत. कैमरा का नज़र में रहबऽ से कवनो जेल कर्मी पइसो ले के तोहार मदद ना कर पाई.

तू राहे में बाड़ऽ बाकिर योगी अबहिंए से तोहार पल-पल के हाल जानल शुरू कर दिहले बाड़न. बस एके काम करीहऽ मुख़्तार अंसारी कि तू फँसरी मत लगा लीहऽ अइसन कवनो खबर मत बने दीहऽ. अब देखऽ ना, आज़म खान आत्महत्या कइलसि का ? ना नू ! तुहुँ मत करीहऽ तबले जबले कृष्णानंद राय समेत तमाम मामिलन में तोहरा के फांसी के सज़ा नइखे मिल जात. निश्चिंत रहऽ, हम पूरा दावा से कहत बानी कि अगर तू पहिलहीं फँसरी ना लगा लीहलऽ त तोहरा फांसिए के सज़ा मिली आ फांसिए होखी. चाहे त तोहार समर्थक पमरा एह लिखलका के सेंवत के रख लेव, ताकि सनद रहो आ वक्त ज़रूरत कामे आवे कि तोहरा फांसी होखी, हर हाल में होखी. कोर्ट में अब तारीख ना मिली. खटाखट सुनवाई आ फ़ैसला होखी. फांसी क तख्ता पर इहे क़ानून तोहरा के ले जाई जवना का बूते तू बचे के तमाम बंदोबस्त कइलऽ अबहीं ले. एहू ले कि अब निजाम बदल गइल बा. लोहार मिजाजपुर्सी करे वाला निजाम अब टाइल आ टोटी चोरी में अझूराइल बा.

हमरा इयाद बा, निकहा से इयाद बा कि विधान सभा में जब सपाई गुंडा विधायक मायावती के जान से मारे का जतन में रहलें, फसाद शुरू कइलें तब मायावती के एक इशारा पर कइसे तू कवच-कुण्डल बन के मायावती के सुरक्षा में ठाड़ हो गइल रहऽ. सपा विधायकन के सगरी गुंडई, सगरी प्लानिंग के तू अकेलहीं अपना दम पर ख़ामोश रहतो फेल कर दीहलऽ. आ मायावती कइसे कवनो बचवन जइसन बकैया-बकैया भागल रहली, विधान सभा से. आ तू पाछा-पाछा उनुके कवनो कमांडो का तरह छपले रहुवऽ, मुख़्तार अंसारी, ई सब जब हम साक्षात विधान सभा का प्रेस गैलरी से देखले रहनी आ तोहार ओह दिलेरी पर दिल आ गइल रहे. बाकिर जब आज ख़बरन में पढ़नीं कि आगरा लखनऊ एक्सप्रेस वे पर तू पतई नियर काँपत रहुवऽ त तुरते यक़ीन ना भइल.

ऊ सपाई जवन गेस्ट हाऊस में मायावती के ना मार सकल रहलें, ओह दिन विधान सभा में घेर के मारल चाहत रहलें. कल्याण सिंह सरकार के बहुमत मिले, ना मिले एहसे सपा के गुंडा विधायकन के कुछ लेबे-देबे के ना रहुवे. विधान सभा में उनकर फसाद के मक़सद सिर्फ़ मायावती के जान लेबे के रहुवे. ऊ अपना नेता मुलायम के बेइज्जति के बदला लीहल चाहत रहलें ओह मायावती से, जवन तब मुख्य मंत्री, उत्तर प्रदेश रहल मुलायम के कान पकड़ के उठक-बइठक करववले रहुवेय एह उठक-बइठक के चुपके से फ़ोटो खिंचवा के एगो अख़बार में छपवाइओ दिहले रहुवे.

एही बात के बदला ऊ गेस्ट हाऊस में मायावती के हत्या क के लीहल चाहत रहलें तब मौका पर सुबह-सुबह भाजपा विधायक ब्रह्मदत्त मायावती के जान बचा लिहले रहलेय ओही दिन संसद में मामला उठा के अटल बिहारी वाजपेइओ मायावती को सुरक्षा दिलवा दिहले. फेरु समूचा प्रदेश इकाई के खिलाफ रहतो अटल जी मायावती के मुख्य मंत्री बनवा दिहले रहलें बाकिर जब अटल जी के आपन प्रधान मंत्री पद बचावे खातिर जरुरत पड़ल त मायावती जुबान देइयो के पलट गइल रहली. ओह मायावती के मुख़्तार अंसारी तू ओहदिन दिन विधान सभा में जीवन दे दीहलऽ.

ऊ दृश्य हमरा आंखिन में आजुओ जस के तस बसल बा. ऊ मायावती आ ओकर पिट्ठू वकील सतीश मिश्रा तोहरा बचाव में भला खड़ा होखिंहे का ? हरगिज ना. तोहार अरबों के संपत्ति धँसा-भसा दीहल गइल बा. सेक्यूलर फोर्सेज के गिनिती-पहाड़ो धँस-भस चुकल बा. अब कुछुओ बाचल नइखे. बचल बा त बस तोहार फांसी. तोहार एह फांसी के प्रतीक्षा हम बहुते बेसब्री से करत बानी. काहेकि हम मानत बानी कि तोहरा जइसन दुर्दांत अपराधी के जीए के कवनो हक़ नइखे. राजनीतिए ना, समाजो में तोहरा रहे के हक नइखे. मानवता के दुश्मन हउवऽ तू आ तोहरा तरह के लोग.

(दयानन्द पाण्डेय के ब्लॉग http://sarokarnama.blogspot.com/2021/04/blog-post.html से उल्था कइल.)

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