भ्रष्टाचार सबले बड़ समस्या बाकिर कुछ निदानो त होखो

– पाण्डेय हरिराम

आजुकाल्हु अइसन लागे लागल बा कि मानो भ्रष्टाचार आ साम्प्रदायिकता देश के सबले बड़हन समस्या बाड़ी सँ आ एकनी के खतम होखते देश के सगरी समस्या खतम हो जाई.

कांग्रेस के ८३ वाँ महाधिवेशन सोमार का दिने खतम हो गइल. एह अधिवेशन में पार्टी अध्यक्षा सोनिया गाँधी आ दोसर नेता भ्रष्टाचार आ साम्प्रदायिकता पर सबले बेसी आ तीख वार कइलें. सोनिया गाँधी विपक्ष पर सोझा हमला बोलली आ टेलीकॉम घोटाला का चलते संसद ना चले दिहला खातिर आपन नाराजगी जाहिर कइली. अपना भाषण में ऊ धार्मिको आतंकवाद पर निशाना सधली.

अधिवेशन का पहिलही से देश के राजनीतिक वातावरण बहुते धीप चुकल बा. राजा के टेलीकॉम घोटाला, पत्रकारन नेतवन आ उद्योगपतियन के साथे नीरा राडिया के टेलीफोन बातचीत के चुनिन्दा टेप, बिहार चुनाव में कांग्रेस के मिलल बड़हन हार, आ विकिलिक्स का खुलासा से देश एगो गजबे माहौल से गुजरत बुझात बा.

एह सबसे कांग्रेस पार्टी के फरका रहल मुश्किल बा. एही बिचे प्रधानमंत्री डा॰ मनमोहनो सिंह विपक्ष का हमला का जद में आ गइल बाड़न, जनता उनुका साफ बेदाग छवि पर सवाल उठावल शुरु कर दिहले बिया. एह हालात में भ्रष्टाचार के मुद्दा बनावल सोनिया गाँधी के बड़ रणनीति बुझात बा. ऊ एह सबसे जुड़ल मामिला में कर्नाटक के नाम ले के भाजपा से पूछली कि भाजपा कइसे भ्रष्टाचार का मुद्दा पर दूमुँहा बाति कर सकेले. साफे लागत बा कि ऊ जनता के ध्यान ओह सब से अलग दोसरा तरफ ले जाये के चाहत बाड़ी. एह साल का शुरुआत में करावल एगो सर्वेक्षण से गैलप इंटरनेशनल के निष्कर्ष रहे कि ५४ फीसदी लोग एह बाति के सकारल कि ऊ लोग पिछला एक साल का दौरान घूस दे के आपन काम करवलन. अब रउरा घूस दिहला के कवनो कारण से जायज ठहराईं बाकिर इहो ओतने कड़ुआ साँच बा कि अइसनका हर काम से देश के कवनो दोसरा नागरिक के जायज न्यायोचित अधिकारन के अनदेखी होखेला. काल्हु जब उहे आदमी हार थाक के घूस दे के आपन काम करावेला त हमनी का व्यवस्था के दूसे लागेनी जा. रेलगाड़ी में बिना आरक्षण करवले सफर करे का दौरान टीटीई के पइसा दे के खलिया बर्थ हथियावत घरी हमनी का मन में कबहियों ई विचार काहे ना आवेला कि जवना यात्री का लगे प्रतीक्षा सूची के टिकट बा हमनी का ओकर हक मार रहल बानी जा !

एह हालात में ई एकदमे स्वाभाविक बा कि नाजायज तरीका से उपर उठल लोग का बीच में एगो बे बोलल बे नाम लिहल गठजोड़ जइसन बन जाला. समाज के गिरत नैतिकता का बावजूद समाज के हर तबका में निमना लोग के कमी नइखे. बाकी धीरे धीरे एहू नेक लोगन पर नकारात्मकता हावी होखत जाले. तंत्र के उदासीनता अइसनका लोग के निराशावाद का ओरि धकेलेले. नतीजा ई होला कि जे लोग समाह के बढ़न्ती का राह पर ले जाये में अहम भूमिका निभा सकत रहे ऊ लोग आपसी बातचीत में अपना मन के भड़ास निकाले खातिर मजबूर हो जालें. धीरे धीरे ओह लोग के ई धारणा मजबूत होत जाले कि व्यवस्था में अतना घुन लाग चुकल बा कि अब एकर कुछूओ भलाई ना कइल जा सके. मननी कि भ्रष्टाचार का खिलाफ लड़ाई आसान नइखे बाकिर का कबो कवनो बड़हन चीज आसानी से भेंटाइल बा ?


पाण्डेय हरिराम जी कोलकाता से प्रकाशित होखे वाला लोकप्रिय हिन्दी अखबार “सन्मार्ग” के संपादक हईं आ ई लेख उहाँ का अपना ब्लॉग पर हिन्दी में लिखले बानी. अँजोरिया के नीति हमेशा से रहल बा कि दोसरा भाषा में लिखल सामग्री के भोजपुरी अनुवाद समय समय पर पाठकन के परोसल जाव आ ओहि नीति का तहत इहो लेख दिहल जा रहल बा.अनुवाद के अशुद्धि खातिर अँजोरिये जिम्मेवार होखी.