पिछला दिने जवन कुछ भइल तवन बहुत दुखद रहल. मुंबई पर एक बेर फेरु से आतंकी हमला हो गइल तब बुझाइल कि देस के जनता कतना बेअसरा हो गइल बिया. केहू नइखे जे ओकरा के असरा, आश्रय, पनाह दे सको. जे दे सकत रहे ऊ त खुदे बेअसर हो के रह गइल बा. ओकरा बात के केहू पर कतही असरे नइखे होखत. आ जब जे सब पर सर रहे के चाहीं उहे बेअसर हो जाव त जनता के त बेअसरा होखही के बा. सर अपना कार से होला. कार ना करे त सरकार कइसन ? आतंकी जबे मन करऽता हमला कर भा करवा देत बाड़े आ हमनी का ओकरा के छोड़ अपने गोतिया दयाद के काटे पर लाग जात बानी. मुजाहिदीन भा सिमी के नाम लेबे में जीभ भले लपटा जाव बाकिर संघ के नाम लेके कुकुरबझाँव करे में इचिको लाज नइखे लागे के. अब कुकुरबझाँव आ कुकुरहट में कवनो बेसी फरक त होले ना. कुकुरन के त बस भूंके के बा. पागल कुकुर बतासे भूके. हवो बतास से ओकरा लागी कि केहू आवत बा आ लागी भूके. पिछला हफ्ता के बतुस का बाद आजु देखीं बातेबात में बतास आ गइल. आ मुंबई के दुख देख के तरास लाग गइल त कवन अचरज. संस्कृत के संत्रास से त्रास लागे ला, पियास लाग जाला, आ भोजपुरी में आके ऊ तरास बन जाला. अब तन के तरास आ मन के तरास के अगर सही दिशा में लगा दिहल जाव त आदमी कुछुओ तराश सकेला. ओह तराशे का चलते भलही ओकरा के संगतराश कह दिहल जाव बाकिर संगे रहि के घात करे वाला संघतियन के तराश के आदमीओ बनावल ओतने जरूरी बा. मानत बानी कि संघतिया बहुते करीबी दोस्त के कहल जाला. जेकरा से हमेशा संग बनल रहे उहे संघतिया होला. बाकिर समय बदलल जात बा आ अब संघतिया के मतलबो बदल जाव त कवन शिकायत ? बाकिर तब हमनी के फेर से संगतराश बने के पड़ी आ एह पत्थरदिल आतंकियन के छिलछाल के फेर से आदमियत का तरफ ले आवे के पड़ी. अब आजु बतकुच्चन करत करत कुछ काम के बात निकल आइल त हमार दोस नइखे. जे ना माने ओकर दोस ! बन्दो घड़ी दिन में दू हाली सही समय बता देले त बतकुच्चने में का खराबी बा ?

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