बढ़ावन – 2 : भोजपुरी लोक के गृहस्थ-संस्कृति

– डाॅ. अशोक द्विवेदी गंगा, सरजू, सोन का पाट में फइलल खेतिहर-संस्कृति दरसल “परिवार” का नेइं पर बनल गृहस्थ संस्कृति हऽ. परिवार बना के रहे खातिर पुरुष स्त्री क गँठजोरा…

बढ़ावन – 1 : लोक का भाव-भूमि पर

– डाॅ. अशोक द्विवेदी हमार बाबा, ढेर पढ़ुवा लोगन का बचकाना गलती आ अज्ञान पर हँसत झट से कहसु, “पढ़ लिखि भइले लखनचन पाड़ा !” पाड़ा माने मूरख; समाजिक अनुभव-ज्ञान…

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