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Author: कार्यकारी सम्पादक

गोधन

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स्व. परमेश्वर दूबे ‘शाहाबादी’ के शोध ग्रंथ के लोकार्पण समारोह

जमशेदपुर के प्रतिनिधि साहित्यिक संस्था ‘रचनाकार’ का बैनर तले एकर संस्थापक सचिव डॉ परमेश्वर दूबे ‘शाहाबादी’ के शोध ग्रंथ “पूर्वी उत्तरप्रदेश की भोजपुरी लोककथाओं का सामाजिक अध्ययन” के लोकार्पण 8 अक्टूबर 2017 के एगो विशेष समारोह में कइल गइल। ई आयोजन टेल्को कॉलोनी स्थित संगीत समाज सभागार, जमशेदपुर (झारखंड) में साँझ 4.30 बजे से आयोजित भइल। एह आयोजन के सफल संचालन डॉ संध्या सिन्हा जी कइलीं, ओहिजे अध्यक्षता मुजफ्फरपुर से आइल डॉ ब्रजभूषण मिश्र जी कइलीं। मुख्य अतिथि का रूप में पटना से आइल डॉ भगवती प्रसाद द्विवेदी जी आ मुख्य वक्ता डॉ जयकांत सिंह जय, मुजफ्फरपुर से उपस्थित...

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हर रंग में रंगाइल : ‘फगुआ के पहरा’

– केशव मोहन पाण्डेय एगो किताब के भूमिका में रवीन्द्रनाथ श्रीवास्तव ऊर्फ जुगानी भाई लिखले बाड़े कि ‘भाषा आ भोजन के सवाल एक-दोसरा से हमेशा जुड़ल रहेला. जवने जगही क भाषा गरीब हो जाले, अपनहीं लोग के आँखि में हीन हो जाले, ओह क लोग हीन आ गरीब हो जालंऽ.’ ओही के झरोखा से देखत आज बड़ा सीना चकराऽ के कहल जा सकत बा कि भोजपुरी समृद्ध बा, भोजपुरिया मनई समृद्ध बा. हमरा ई बात कहला के बहाना श्रेष्ठ शिक्षक, सुलझल मनई आ सरस मन के मालिक कवि-साहित्यकार डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल जी के किताब ‘फगुआ के पहरा’ बा. एह किताब के पढ़ला पर बिना कवनो चश्मे के...

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भोजपुरी समाज, दिल्ली के सम्मान समारोह

“पूर्वांचल के माटी उर्वर हटे.एहिजा के लोग दिल्ली का, कतहीं अपना मेहनत से मिट्टी के सोना बना देलन.” ई बात रविवार, दिनांक 25 जून के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में भोजपुरी समाज, दिल्ली द्वारा सम्मान समारोह का अवसर पर सांसद आ दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष मनोज तिवारी कहलें. ऊ जनता का सङहीं भोजपुरी समाज के भी ओकरा द्वारा कइल जा रहल भाषा के विकास का साथे-साथ समाज के जोड़ेवाला प्रयासन खातिर धन्यवाद ज्ञापित कइलें.  भोजपुरी समाज, दिल्ली के अध्यक्ष श्री अजीत दुबे अपना बीज वक्तव्य में आगंतुक लोगन का प्रति सभ पूर्वांचली लोगन का ओर से शुभकामना व्यक्त कइलें. एह...

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नीक-जबून-9

डायरी – डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल बुदबुदाई अब समय मौसम के सुगबुगाहट के पता साफ-साफ चल जाता. काल्हु तक के टेढ़ आ लरुआइल पतइयो आजु हवा का सङे घुमरी-परउआ खेले लागल बाड़ी सन. टीबी से लेके सोशल साइट तक एकही विषय छवले बा- स्त्री विमर्श. बदलाव के धमस साफ-साफ सुना रहल बा. बैरागी लोगन का प्रति आस्था बढ़ रहल बा. प्रशासन में विश्वसनीयता के पर्याय बन रहल बा लोग. अलग-अलग तबका के मेहरारुन के दुख-दर्द सुनावे में मीडिया दिलचस्पी ले रहल बिया. न्यायालय पर सभके नजर लागल बा- चाहे मुद्दा राम मंदिर के होखो, मेहरारुन पर अत्याचार के होखो...

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नीक-जबून-8

डायरी सरगो से नीमन बाटे सइँया के गाँव रे – डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल बसंत का आइल, गाँव के इयादि एक-एक क के ऊठत-बइठत आ सूतत खा तंग करे लागलि. होलरि, खातिर रहरेठा, झीली निकाले खातिर सरसो के अबटन आ मधि रतिए होलरि-होलरि के आवाज चारों ओरि से. ओही में हमनियो का आवाज में आवाज मिलावत, कान्ही पर होलरि ध के तरना के चलीं जा लरिकाईं में. एही गाँव-प्रेम में फेसबुक पर अपना गाँव का नाँव से एगो ग्रुपो बना दिहलीं. हम जानत रहीं कि काम भर लोग एहमें नइखन, तबो ई सोचिके कि लोग आजु ना काल्हु अइबे...

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“बैर के अंत” के मंचन

– रश्मि प्रियदर्शिनी प्रेमचंद समाज के हर पहलू के जवन सूक्ष्म चित्रण कर गइल बानी, सहज सरल रूप में जवन आईना सबका सामने रख गइल बानी, ऊ अद्भुत बा. आज के समय में भी उहाँके लिखल तमाम रचना ओतने समसामयिक बा. भाई-बंधू के ताना बाना पर भी प्रेमचंद बहुत खूब लिख गइल बानी. उहें के लिखल अत्यंत लोकप्रिय रचना “बैर का अंत” के भोजपुरी रूपांतरण “बैर के अंत” के मंचन विगत 31 मार्च के मुक्तधारा प्रेक्षागृह में रंगश्री द्वारा भइल. नाटक के परिकल्पना अउरी नाट्य रूपांतरण रंगश्री के संस्थापक महेंद्र प्रसाद सिंह जी कइनी. ई धरती पर सभ्यता के...

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भोजपुरी के रवींद्र महेंदर मिसिर का सृजन के विविध आयाम

– डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल साइते केहू भोजपुरिहा होई जे “अंगुरी में डँसले बिया नगिनिया रे, ए ननदी सैंया के जगा द.” आ “सासु मोरा मारे रामा बाँस के छिउँकिया, ए ननदिया मोरी रे सुसुकत पनिया के जाय.” जइसन पुरबी के लोकप्रिय धुनन से परिचित ना होई. ‘पुरबी’ धुन के जनक आ भोजपुरी के असाधारण कवि महेंद्र मिश्र (महेंदर मिसिर) का आँचर पर जो जेल जाए के दाग ना लागल रहित त साइत आजु ऊ भोजपुरी के रवींद्रनाथ ठाकुर कहइतन. ई बात दीगर बा कि नोट छापला का चलते उनुका जेल जाए का मूल में उनकर राष्ट्रभक्ति रहे. एह...

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भजपूरी* काहें लिखवावत बानी भाई ?

– रामरक्षा मिश्र विमल हिंदी लीखे में पानी छूटेला हमरा भजपूरी* काहें लिखवावत बानी भाई ? पग पग पर गूगल के सरन लिहींला कवनो भाषा से अनुवाद करींला भलहीं पेपर के कोश्चन बूझे ना केहू समझा-समझा के लिखवावत बानी भाई. बचने ना लिंगो पर आफति आई हाथी आ दहियो के ईजति जाई गदहा के सिंघिए हो जाई भी आ ही ओ अस इक्सरसाइज करवावत बानी भाई. रउरा लागत बा लइका पढ़िहें सन पढ़िके इंजिनियर डीएम बनिहें सन बुधुओ के लइका भीरी फारेन भेजवाइबि मजगर सपना मन अँखुआवत बानी भाई....

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नीक-जबून-7

डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल के डायरी प्राचार्य डॉ. संजय सिंह ‘सेंगर’ आजु स्टाफ रूम में इंस्पेक्शन के बात एक-एक क के उघरत रहे. हमरा प्राचार्य डॉ. संजय सिंह ‘सेंगर’ जी याद आ गइल रहीं आ हम भावुक हो गइल रहीं. 5 जनवरी के उहाँ से खड़े-खड़े भइल आधा घंटा के बतकही के एक-एक शब्द हमरा याद रहे. हमार कलिग लोग के भी आँखि भरि आइल. भइल ई रहे कि सेंगर जी का विद्यालय के एगो सब-स्टाफ के दूनो किडनी फेल हो गइल. ओकरा तीन गो लइकी रही सन आ एकहूँ के अभी बियाह ना भइल रहे. ओह गरीब परिवार...

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