पंडित विद्यानिवास मिश्र के जयंती का मौका पर 14 जनवरी 2015 का दिने भोजपुरी के महान साहित्यकार डा॰ अशोक द्विवेदी के ‘लोककवि सम्मान’ से सम्मानित कइल जाई. पंडित विद्यानिवास मिश्र के स्मृति में दिहल जाए वाला पुरस्कार खातिर एगो चयन समिति सुनीता जैन का अध्यक्षता में बनल रहे. सदस्य रहलेपूरा पढ़ीं…

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भोजपुरी में लिखल आ कृति फान्ट भा यूनिकोड में टाइप कइल ‘हमार गाँव (……………..) जतना हम जानीं’ मथैला वाला निबन्ध गाँव में रहे व‌ालन से माँगल जात बा. एह लेख में अपना गाँव का बारे में अधिका से अधिका जानकारी, इतिहास आ भूगोल समेत, कम से कम एगो फोटो कापूरा पढ़ीं…

भोजपुरीए ना हिन्दीओ पत्रिकन के प्रकाशन आजुकाल्हु मुश्किल हो गइल बा काहे कि एक त लोग पढ़े के आदत छोड़ दिहले बा आ दोसरे किताब खरीदे के. रोज रोज के खरचे जुटावल जब मुश्किल बनल होखे त किताब भा पत्र-पत्रिकन के के खरीदो. बाकिर सवाल बा कि भोजपुरी में प्रकाशनपूरा पढ़ीं…

एक साल पहिले अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन के रजत जयन्ती अधिवेशन पटना में 28-29 दिसंबर 2013 के करावल गइल रहे. तब एह मौका पर ओह घरी भाजपा के महासचिव रहल रविशंकर प्रसाद कहले रहले कि, ‘ई भाषा के मिठास सबके दिल जीत लेला. अटल जी प्रधानमंत्री रहलन त मैथिलीपूरा पढ़ीं…

– डॉ॰ उमेशजी ओझा औरत आपन पुरा उमिर अपने-आप के सुहरावे आ सम्हारे में परेशान रहेली. काहे कि हमनी के पुरूष प्रधान देश में औरतन के डेग-डेग प आहत कइल जाला. ई लोग समाज में आर्थिक नजर से अपना पति भा कवनो मरद प निर्भर रहे वाली होली. खाली बइठलपूरा पढ़ीं…

– डा॰ अशोक द्विवेदी भयावह आ भकसावन लागे वाला ऊ बन सँचहूँ रहस्यमय लागत रहे. जब-तब उहाँ ठहरल अथाह सन्नााटा अनचीन्ह अदृश्य जीव जन्तु भा पक्षियन का फड़फड़ाहट से टूट जात रहे. थोरिके देर पहिले फेड़ का एगो लटकल डाढ़ि से लपटाइल लटकल सरप के फूत्कार प’ आगा चलत युवकपूरा पढ़ीं…

21 दिसंबर के भाजपा के उत्तरी-पूर्वी दिल्ली से सांसद मनोज तिवारी का घर पर दिल्ली विधानसभा के होखे वाला चुनाव में पूर्वांचलियन के मौजूदा स्थिती आ भागीदारी पर विस्तार से चरचा भइल. एह बइठक में राज्य सभा सांसद आर के सिन्हा, पूर्वी दिल्ली के मेयर मीनाक्षी, राम नारायण दूबे, भोजपुरीपूरा पढ़ीं…

– डी आनन्द पानी से सस्ता गरीबन के खून बा, लागऽता देसवा में दू गो कानून बा. जे बा छूछे ओकरा, काहे केहू पूछे, दुनिया-जहान, बिना पइसा के सून बा. केस लटियाइल ब‌ा, सरसो के तेल बिना, बड़का लोगवा खातिर, तेल जैतून बा. ओकर सभे जुर्म, हो जाला माफ हो,पूरा पढ़ीं…

भउजी हो! का बबुआ? काल्हु चौक प एगो आदमी के देखनी जे अगहन में जोगीरा गावत रहुवे. होखी कवनो पागल. अइसनका लोग से दूरे रहे के चाहीं. ठीके कहतारू भउजी. ऊ ससुरा छाती ठोक-ठोक के अपना के हरामजादा साबित करे में लागल रहुवे. कहत रहुवे कि ओकरा नइखे मालूम किपूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय रेलगाड़ी आ रेलवे टीसनन के वर्ल्ड क्लास बनावे के चरचा जोर पर बा. मोदी जी दनादन विदेश जा रहल बाड़े आ उहां से फटाफट विचार ले के चल आव तारे. जब बाबा लस्टमानंद ई बात सुनले कि रेलवे टीसनन के हवाई अड्डा अइसन बनावल जाई त ऊपूरा पढ़ीं…

सहकल, बहकल आ डहकल के चरचा करे के मन करत बा आजु. काहे कि देश में कुछ लोग के अतना सहका दिहल गइल बा कि ऊ बहकल बन गइल बाड़े आ एह बात के कवनो चिन्ता नइखन करत कि उनकर बेवहार केहू के डहकावतो बा. सहके से सहकत, बहके सेपूरा पढ़ीं…