Month: दिसम्बर 2016

मोदियात दुनिया का बीच भगले त गइले बेटा : बाति के बतंगड़ – 13

– ओ. पी. सिंह अबकिओ के दिवाली में पर्यावरण आ पशु प्रेमी होखे के दिखावा करे वाला लोगन के प्रवचन जम के भउवे आ करीब करीब ओतने जम के एह…

बाप के मरले कुँअर, महतारी के मरले टूअर : बाति के बतंगड़ – 12

– ओ. पी. सिंह भोजपुरी कहाउत – बाप के मरले कुँअर, महतारी के मरले टूअर – कतना सही हवे अबकी एगो वंशवादी परिवार के लड़ाई में देखा गइल. समाजवाद के…

भवे भाव से पतोह चाव से : बाति के बतंगड़ – 11

– ओ. पी. सिंह हँ हँ, खिसियइला के जरूरत नइखे. ई एगो खास रणनीति का तहत लिखाइल बा. एह घरी सभे कवनो ना कवनो रणनीति बना के बइठल बा. सर्जिकल…

घाव अइसन कि ना देखावते बने ना बतावते : बाति के बतंगड़ – 10

– ओ. पी. सिंह पाकिस्तान के आदत से तंग आ के पिछला हफ्ता भारत आपन “रणनीतिक संयम” के रणनीति छोड़ के पलटवार कइये दिहलसि. आ अइसन घाव दे दिहलसि कि…

नीक-जबून- 4

डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल के डायरी   चले दीं, प्रयोग बहे दीं धार काल्हु “ये दिल माँगे मोर” पर बहस होत रहे. हम कहलीं कि भाई ‘मोर’ का जगहा ‘और’…