– आलोक पुराणिक ढेरे सनसनी बा. कवनो टीवी चैनल के भासा उधार ले लीं त ई कहल जा सकेला कि पूरा मुल्के में सनसनी बा. मुल्के काहे पूरा दुनिया में सनसनी बा. एगो टीवी चैनल एही मसला पर पूरा एक घंटा के रपट परोस दिहलसि कि – प्रियंका चोपड़ा अपनापूरा पढ़ीं…

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– ऋचा चलऽ, फेरु सपनन के फेंड़ लगाईं जा ! मउरल-दनात अमराई से अलगा सड़की का गुलमुहरन का नीचे लुकवा दीं जा कूल्हि पुरान योजना हरियर सुतरी अस लटकत सहजन का झोंप में बान्हि आईं जा आपन चाह-चिन्ता जवन होई, तवन होई आवऽ रेंगनी का काँटन से लथरल जथारथ मेंपूरा पढ़ीं…

– आनन्द संधिदूत जब आँगन का बीच में डँड़वार आ खेत का बीच में सड़क निकललि त खेत क बगड़ी आँगन का गउरइया किहें आके कहलसि कि लऽ ए बहिनी तोहके त आराम हो गइल एक बखरी से दू बखरी हो गइल दूनो ओर दाना-दूनी, जूठ-कांठ गिरी आ तोहार बालपूरा पढ़ीं…

आनन्द संधिदूत एही दीयर में बा हमरो खेत क एगो छोट-मोट टुकड़ा जवन हम देखले नइखीं। ओही खेत क गोजई-रहिला जब हमरा आँगन में गिरे त हमार माई ओइसहीं खुस हो जाय जइसे कवनो लइका खेलवना पाके अगरा जाला ऊ कुछ झारे कुछ झूरे कुछ कूटे कुछ पीसे कुछ अँगऊपूरा पढ़ीं…

पप्पू बनि के जीयल आसान ना होखे. ओकरा खातिर बहुते तेज दिमाग राखे के होला. अइसन अइसन बाति सोचे-कहे के पड़ेला जे दोसर केहू सपनो में ना सोच सके. बाकिर पप्पू के दुर्भाग्य कि ऊ इटालियन महतारी का पेट से बाकिर हिन्दुस्तान में जनमल. ओह घरी के कहो ओकरा कईपूरा पढ़ीं…

लरिकाईं में एगो कहानी सुनले रहीं कि बहेलियन का जाल में फँसे वाला चिरईयन के दशा देख दुखी भइल एगो संत चिरईयन के रटा दिहलें कि – शिकारी आएगा, जाल बिछाएगा, लोभ से उसमें फँसना नहीं. चिरई दिन दिन भर एह बात के माला जपल करऽ सँ आ दाना चुगतपूरा पढ़ीं…

दिल्ली के संसद मार्ग पर होई भोजपुरिया जुटान भोजपुरी के संवैधानिक मान्यता आ आठवीं अनुसूची में शामिल करावे खातिर पूर्वांचल एकता मंच, भोजपुरी जन जागरण अभियान, अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन, अखिल भारतीय भोजपुरी लेखक संघ आ रंगश्री के संयुक्त तत्वावधान में 7अगस्त, 2018 दिन मंगलवार के विशाल धरना प्रदर्शनपूरा पढ़ीं…

एगो जमाना उहो रहुवे राजीव गाँधी का बेरा जब जनता में ई बहुते प्रचलित हो गइल रहल कि सौ में निनान्बे बेइमान, तबहियों हमार देश महान. कहे वाला त मजाक में, तंज में कहत रहलें बाकिर इहो एगो सचाइए हऽ कि एतना बेइमानन के मौजूदगी का बादो हमनी के देशपूरा पढ़ीं…

पुरनका जमाना से सुनत आइल बानी स ई तंज कि – बूड़ल वंश कबीर के जमले पूत कमाल. पूत अगर कपूत हो जाव तबो महतारी ओकरा के कपूत माने ला तइयार ना होखे. कबीर का साथे अइसन कवनो पुत्रमोह के बात कबो सुने के नइखे मिलल. अइसन नइखे कि कमालपूरा पढ़ीं…

जस-जस दिन नियराइल जात बा तस-तस राजनीति के रंग अउरो सियाह होखल जात बा. एक बाति त सभके मानही के पड़ी कि आवे वाला लोकसभा चुनाव देशो खातिर आ एहिजा के बिखराइल हिन्दुवनो खातिर जिए-मरे के लड़ाई बने वाला बा. चार बाँस चउबीस गज अंगुल अष्ट प्रमाण, एते प सुलतानपूरा पढ़ीं…

अगिला लोकसभा चुनाव में अब सालो भर नइखे रहि गइल. अबकि के चुनाव देश के जीवन मरण के सवाल होखे जा रहल बा एहसे सभकर जिम्मेदारी बा कि आपन निजी फायदा-नुकसान से उपर उठिके देश के फायदा-नुकसान का बारे में सोचत आपन भोट देव. दुनु तरफ परिवारे बाड़ी सँ. भापूरा पढ़ीं…