देर से मिलल खबर बाकिर खबर मजगर बा. दिल्ली में पिछला चार अगस्त का दिने सौ गो से बेसी भोजपुरी संगठन भा संस्था के कार्यकर्ता जंतर मंतर पर धरना प्रदर्शन कइले जवना में भोजपुरी के संविधान के आठवीं अनुसूची में शामिल करावे के माँग कइल गइल. एह धरना प्रदर्शन में हजारो लोग शामिल रहे आ पुलिस करीब दू दर्जन लोग के हिरासतो में ले लिहलसि.

एह धरना प्रदर्शन में पूर्वांचल एकता मंच के अध्यक्ष शिवजी सिंह कहले कि अगर सरकार एही सत्र में भोजपुरी के आठवीं अनुसूची में शामिल करावे वाला प्रस्ताव नइखे ले आवत त भोजपुरिया सड़क पर आवे ला मजबूर हो जइहें आ पूरा देश में आन्दोलन कइल जाई. भोजपुरी भाषा, साहित्य एवं सांस्कृतिक केंद्र, इग्नू के निदेशक प्रो. शत्रुघ्न कुमार कहले कि दुनिया के सगरी भाषा मीठ आ महत्व वाली हईं स आ भोजपुरिओ ऊहि में शामिल बा. आदि काल से वर्तमान काल ले भोजपुरी साहित्य में महिला आ वंचित वर्ग को जगहा दिहल गइल बा आ एह भाषा के अबही ले मान्यता ना दे के सरकार देश के अपमान कइले बिया. बी.आर.ए. बिहार विश्वविद्यालय के लंगट सिंह कॉलेज, मुज़फ्फरपुर में भोजपुरी भाषा केन्द्र अध्यक्ष डॉ. जयकांत सिंह जय के कहना रहल कि सरकार भोजपुरी का साथे अनेरे बेजरूरत भेदभाव करत बिया. भोजपुरी भाषा में लोक साहित्य, शिष्ट साहित्य, लिपि, व्याकरण, इतिहास अउर पठन-पाठन सामग्री समेत हर ऊ चीज बा जवन संविधान से मान्यता प्राप्त दोसरा कवनो भाषा में बा.

पूर्वांचल एकता मंच के संयोजक चंद्रशेखर राय कहले कि ‘‘भोजपुरी हमनी के मातृभाषा ह आ एकरा के हमनी का अपना महतारिये लेखा मानी ले सँ.एह भाषा में पढ़िये के हमनी के मौजूदा आ आवे वाली पीढ़ी हमनी के पुरातन संस्कृति के समुझ पाई. पूर्वांचल एकता मंच के संरक्षक संजय सिंह कहले कि आजु त एके दिन के धरना प्रदर्शन कइल जा रहल बा बाकिर अगर सरकार ना मानल त देश भर में आन्दोलन चलायब सँ.

सभा के संबोधित करत संतोष पटेल कहले कि भोजपुरी संवैधानिक मान्यता के हर मापदण्डों पूरा करेले ए अकरा के जल्दी से जल्दी मान्यता मिले के चाही. मंच के संरक्षक सतेन्द्र सिंह राणा कहले कि हमनी का ‘विश्व भोजपुरी सम्मेलन’ का माध्यम से नेतालोग के एही से इज्जत करीले जा कि ऊ लोग संसद में आपन आवाज बुलन्द करी. अगर उ लोग अइसन ना करी त हमनी का खुद आपन आवजा उठायब. मुकेश कुमार सिंह, प्रवक्ता पूर्वांचल एकता मंच, के कहना रहल कि देश के लगभग 25 करोड़ आबादी भोजपुरी बोले समुझेला आ दुख बा कि सरकार एकरा के सही जगाह नइखे दिहले.

धरना प्रदर्शन में नेपाल से राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता, चेयरमैन पशुपति ट्राँसपोर्ट (वीरगंज), बतवले कि नेपाल में संविधान बनावल जा रहल बा आ ओहिजा भोजपुरी को राष्ट्रभाषा का रूप में शामिल करे के बात हो रहल बा. सभा के संबोधित करे वालन में युवा नेता संतोष ओझा, हमार टी.वी. के क्रियेटिव हेड मनोज भावुक, पूर्वांचल एक्सप्रेस के कुलदीप श्रीवास्तव, महिपालपुर से संतोष भट्ट, नारायणा से बजरंगी प्रसाद, बिहारी खबर के मुन्ना पाठक वगैरह शामिल रहले. धरना में शामिल होखे वालन में खास खास लोग में भोजपुरिया अमन के संपादक डॉ. जनार्दन सिंह, अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन के विश्वनाथ शर्मा, पूरवैया (रजि.) के अविनाश पाण्डे आ ध्रुव प्रसाद, पूर्वांचल एकता मंच के नागेन्द्र सिंह, मन्नू सिंह, सुरेन्दर सिंह, रामप्रीत यादव, संतोष सिंह, रविन्द्र दुबे, एस. के. पाण्डेय, श्रीकांत विद्यार्थी, श्रीकारत यादव वगैरह रहले.

सभा के समाप्ति पूर्वांचल एकता मंच के कोषाध्यक्ष अमरेन्दर सिंह आ कानूनी सलाहकार, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता विशाल सिन्हा के धन्यवाद ज्ञापन से भइल.

सभा का बाद धरना स्थल से धारा 144 के अनदेखी करत हजारों कार्यकर्ता संसद मार्ग ओरि कूच कइले बाकिर बीचे राह में संसद मार्ग पुलिस बढ़े से रोक दिहलसि. मुख्य पदाधिकारियन के हिरासतो में ले लिहलसि. बाद मे प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष, मानव संसाधन विकास मंत्री, सूचना एवं प्रसारण मंत्री, खेल एवं कला मंत्री के भोजपुरी भाषा के अष्टम अनुसूची में शामिल करावे खातिर ज्ञापन सँउपल गइल.

संतोष पटेल से मिलल खबर पर आधारित.

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8 thoughts on “भोजपुरी के मान्यता खातिर दिल्ली में धरना प्रदर्शन”
  1. अफशोश कि हामारा के मालुम ना रहे लेकिन जे भी भोज्पुरिया भाई लामीयल भईल ओकर उत्साह देख के हामरा खुशी होत बा. आशा बा सर्कार हमनि के बात जरुर सुनी.

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