– अशोक कुमार तिवारी जीए द जनता के चाहे गरदन जाँत मुआव, हटे देश बपौती तहरे जइसे मन चलावऽ. स्वास्थ सड़क शिक्षा तीनोें के धइले बा बदहाली, तोहरा एकर कवन फेर बा काटऽतारऽ छाल्ही. एहिजा जरे बदन घाम में, ओहिजा चले एसी, इहाँ तियन से भेंटे ना बा, उहवाँ मुरगापूरा पढ़ीं…

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– रामदेव शुक्ल मीतू हम दूनू जने उहाँ पहुंचि गइल बानी जाँ, जहाँ से लवटले के कवनो राहि नइखे बँचल। अगहीं बढ़े के बा, चाहे एहर बढ़ि चलल जा, चाहे ओहर। बोलऽ कवने ओर चलल जाव? मीता के लिलार चमकि उठल। कहली- ”तहार कहल आ हमार सूनल, ई कबसे होपूरा पढ़ीं…

भोजपुरी के रूप-रंग, सुभाव, संघर्ष आ कबो हार ना माने के प्रवृति ओकर आपन खासियत ह. नियतु आ भ्रष्टाचार का पाटन में पिसा, श्रम संघर्ष आ जिजिविषा का बूते उठ खड़ा होखे वाला भोजपुरिहा जइसे अपना भासा में प्रेम आ उल्लास के छन ना भुलाले सन, ओइसहीं भोजपुरी कविता मेंपूरा पढ़ीं…

– प्रिंस रितुराज दुबे सबसे बड़हन सवाल ई बा कि कतना लोग आपन माईभासा (भोजपुरी) ला एकजुट बा. कतना लोग के आपन अस्तित्व से मतलब बा, चाहे कतना लोग ई कह के निकल जाला कि एकरा फेरा में पड़ के कउनो खाए के मिले वाला बा. अगर इहे बात झारखण्डपूरा पढ़ीं…

कंप्यूटर के दुनिया में दू तरह के साफ्टवेयर होला. एगो त प्रोप्राइटरी, जवना के मलिकान कुछ खास लोग का लगे होला आ उहे लोग तय कर सकेला कि एहमें का रही, कइसे रही, का करी वगैरह. दोसरका होला ओपन सोर्स, जवना के मलिकान केहू का लगे ना होखे. जेकरे मनपूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय बाबा लस्टमानंद से रामचेला पूछले, ‘बाबा हो, ई घूरो के दिन कइसे फिरेला?’ बाबा कहले, ‘जे तहरा एकर उत्पत्ति आ टीपण जाने के होखो त भोजपुरिका में बतकुच्चन करे वाला डाक्टर साहेब से सवाच ल. हम त जानत बानी कि आज के जमाना में घूर के दिनपूरा पढ़ीं…

– औम प्रकाश सिंह वइसे त रउरा बहुते कहानी पढ़ले होखब जवन साँच पर आधारित होले. एहिजा जवन हम कहे जात बानी तवन पूरा तरह से कपोल कल्पना ह बाकिर देखीं साँच से कतना मिलत जुलत बा ई कहानी. एगो देश रहे जहाँ कई बरीस का बाद भठियारा राजा केपूरा पढ़ीं…

– प्रिंस रितुराज दुबे ईहां कवनो एल्बम के गाना नइखे लिखल जात, ई एगो साच कथन मनोज तिवारी जी के एल्बम से लिहल गइल बा. भोजपुरी, जवन पूरा दुनिया में अपना मौजूदगी के ताल ठोकत बा, ओही भोजपुरी के जनमे स्थान में हार हो गइल बा. जहाँ बिदेश में मॉरिशसपूरा पढ़ीं…

विश्व भोजपुरी सम्मेलन के बलिया इकाई अउर पाती सांस्कृतिक मंच के एगो बड़हन आयोजन पिछला अतवारा का दिने बलिया के टाउन हाल बापू भवन में भइल. एह आयोजन के पहिला सत्र में पाती संपादक डा॰ अशोक द्विवेदी, प्रो॰ अवधेश प्रधान आ प्रो॰ सदानन्द शाही का हाथै एह साल के “पातीपूरा पढ़ीं…

बहुत दुख के साथ बतावे पड़त बा कि भोजपुरी के मशहूर साहित्यकार चौधरी कन्हैया प्रसाद सिंह के निधन ब्रेन हेमरेेज का चलते पिछला बियफे का रात एगाारह बजे का लगभग हो गइल. ब्रेन हेमरेज का बाद पटना ले जाए का राहे में कन्हैया बाबू के निधन हो गइल. भोजपुर जिलापूरा पढ़ीं…

– रामवृक्ष राय ‘विधुर’ जवार भर में केहू के मजाल ना रहे कि भोला पहलवान का सोझा खड़ा होखे. जब ऊ कवनो बाति पर खिसिया के सनकी हाथी नीयर खड़ा हो जासु त नीमन-नीमन नवहन के साँसि फूले लागे. मीठू ओस्ताद का अखाड़ा में बइठक करे लागसु त उनुका गोड़पूरा पढ़ीं…