भउजी हो ! के ह? केकर भउजी? कइसन भउजी? केंवड़िया खोलबू त देखिए लेबू. जानत बानी कि खिसियाइल बाड़ू. ढेर दिन पर आइल बानी. कनिया आवे के परमिशन दे दिहलसि? अरे ना भउजी, उनकर दोष नइखे. एह घरी हमहीं असकतायाए लागल बानी. नयका सब सुनत नइखन स आ पुरनका लोगपूरा पढ़ीं…

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