“पूर्वांचल के माटी उर्वर हटे.एहिजा के लोग दिल्ली का, कतहीं अपना मेहनत से मिट्टी के सोना बना देलन.” ई बात रविवार, दिनांक 25 जून के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में भोजपुरी समाज, दिल्ली द्वारा सम्मान समारोह का अवसर पर सांसद आ दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष मनोज तिवारी कहलें. ऊ जनता कापूरा पढ़ीं…

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– ओ. पी. सिंह तेज मीडिया का जमाना में रोजे एगो ना एगो मुद्दा पनपना के उठेला. कई बेर ओह मुद्दा के बढ़िया से भँजावे का पहिलहीं एगो दोसर मुद्दा उठ खड़ा होला. सोशल मीडिया प त एह काम खातिर बाकायदा बनल टीम बाड़ी सँ जवन तय करेली सँ किपूरा पढ़ीं…

– ओ. पी. सिंह एहसे पहिले कि हम असल मुद्दा प आईं एगो घटना बतावल जरुरी लागत बा. एक दिन हमरा पड़ोसी के नौकर हमरा से अपना मालिक के शिकायत करत कहलसि कि – देखीं ना ओमप्रकाश जी, संजय जी गजब के आदमी बाड़ें. जहिया हम उनुकj दूध पी लीहिलेंपूरा पढ़ीं…

डायरी – डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल बुदबुदाई अब समय मौसम के सुगबुगाहट के पता साफ-साफ चल जाता. काल्हु तक के टेढ़ आ लरुआइल पतइयो आजु हवा का सङे घुमरी-परउआ खेले लागल बाड़ी सन. टीबी से लेके सोशल साइट तक एकही विषय छवले बा- स्त्री विमर्श. बदलाव के धमस साफ-साफ सुनापूरा पढ़ीं…

– डा0 प्रकाश उदय केहू दिवंगत हो जाला त आमतौर पर कहल जाला कि भगवान उनुका आत्मा के शांति देसु। हमार एगो कवि-मित्र कहेले कि बाकी लोग के त पता ना, बाकिर कवनो रचनाकार खातिर अइसन बात ना कहे के चाहीं। शान्त आत्मा से कवनो रचना त हो ना पाईपूरा पढ़ीं…

– डॉ अशोक द्विवेदी सोशल मीडिया का एह जमाना में वाट्स ऐप,फेसबुक पर, नोकरी-पेशा आ स्वरोजगार में लागल, पढ़ल – लिखल लोग अभिव्यक्ति के माध्यम का रूप में मातृभाषा के अपनवले बा। ऊ झिझक, ऊ संकोच हट गइल बा जवन भाषाई-इन्फिरियरिटी का कारन बनल लागत रहे। मध्यवर्गी, निम्न मध्यवर्गी परिवारपूरा पढ़ीं…

– आलोक पुराणिक राहुल गांधी राष्ट्रपति बेर-बेर विदेश गइल, सक्रिय राजनीति में शामिल ना होखल, इनल गिनल लोगन से मिलल, अइसन सुपर वीआईपी इमेज देख इहे बात दिमाग में बेर बेर आवत बा कि ना कि राहुल गांधी से अधिका एह बातन प के खरा उतरत बा. शिवसेना के विपक्षीपूरा पढ़ीं…

– ओ. पी. सिंह एक बाति आजु हम फेरु रेघरिया दीहल चाहत बानी कि हम सेकूलर ना बन सकीं. हम कम्यूनले रहल नीमन समुझत बानी. ई बाति आजु दोहरावल तिहरावल एह ले जरुरी हो गइल बा कि देश सेकूलरिज्म के नया परिभाषा गढ़ले जात बिया. भारत में सेकूलरिज्म के मतलबपूरा पढ़ीं…

Indian Presidents

अब जब भारत के राष्ट्रपति के चुनाव के तारीख के एलान हो गइल बा त आईं जावल जाव कि भारत के राष्ट्रपति के चुनाव में का शासियत होला. ई चुनाव हमेशा पाँच साल खातिर होला. कबो कबो बीचे में असामयिक निधन का चलते भा कवनो दोसरा कारण से चुनाव करावेपूरा पढ़ीं…

– लव कान्त सिंह “लव” फाटल रहे गुदरा-गुदरी एक्के बेर में सी गइल मार मुस – पियना के सब दारु पी गइल । दरोगा जी के धाव भइल गोड़ में उनका घाव भइल सिपाही के तोन सट गइल बगली उनकर चट गइल केतना भागा-भागी कइके दारु सब जपत भइल फाटलपूरा पढ़ीं…

– ओ. पी. सिंह जमाना बदल गइल बा. आ एकरा साथही बदल गइल बा बोले बतियावे के तरीका. कई बेर कवनो पुरान कहाउत कहे के मन करेला बाकि तुरते दिमाग के लाल बत्ती जर जाले आ ओह मन के बदल देबे के पड़ेला. कई बेर ओह कहाउतन के पॉलिटिकली करेक्टपूरा पढ़ीं…