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Author: OmPrakash Singh

धन्यवाद राहुल गाँधी

– उत्पल बरूआ अपने उमिर के बाकी लोगन जस हमहू कबो राजनीति में रुचि ना रखली. हमरा एकरा से कवनो मतलब नइखे कि गुजरात में मोदी जीतिहें कि हरीहें. बाकि धन्यवाद बा राहुल गाँधी के जे अब हम राजनीतिक सभा के इंतजार करे लागल बानी खास कर के ओह मीटिंगन के जवना में खुद राहुल गाँधी बोले वाला होखसु. अब हमरा के गलत मत समुझीं. कवनो तरह से हम कांग्रेस के समर्थक ना हईं. उलुटे एगो आसामी होखे का चलते हम कांग्रेस के कबो माफ ना कर सकीं ओह सुलूक ला जवन ऊ हमरा राज्य आ हमरा समाज से कइले बिया. बाकिर राहुल गाँधी में हमार रूचि बहुते अलग कारण से हो गइल बा. ई आदमी गजब के मजकिया बा. हमार बात मनला के जरूरत नइखे इनकर कवनो प्रवचन सुन लीं आ ओकरा बाद ट्वीटर पर ओकरा पर होखे वाला तंज पढ़ लीं. एह ले मजेदार कुछ अउर होइए ना सके. कांग्रेस राहुल गाधी के आगे कइले बिया देश के सोझा आइल समस्यन से निपटे खातिर, बाकिर ई त छोटो छोट बात समुझ ना सकसु ओह पर बोले से पहिले. उदाहरण ला देखीं पिछला दिने पंजाब में दिहल इनकर भाषण कि, सत्तर फीसदी पंजाबी नवही नशेड़ी हउवें. जवना शोध का आधार पर राहुल ई बयान दे डलले ओह में कहाइल रहे कि सत्तर फीसदी पंजाबी नशेड़ी नवही बाड़े. अब एह दु बात के मतलब ना समुझ सके वाला आदमी...

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हिन्दूवन से अझुरइह जन

आधुनिक काल के एगो महान खगोलविद् कार्ल सगन के कहना बा कि वैदिक खगोल विज्ञान के समय माप अकेला माप ह जवन आधुनिक समय माप से मेल खाला. अब चूंकि सगन नास्तिक रहले से मानल जा सकेला कि उनुका पर कवनो साम्प्रदायिक प्रभाव ना रहल होई. एगो दोसर खगोलविद् के कहना बा कि साढ़े चार हजार साल पहिले कइल वैदिक गणना आजु के गणना से एकहू मिनट फरका नइखे. जबकि वैज्ञानिक वैदिक ज्ञान, जवन कि हिन्दूत्व आ हिन्दू धर्म संस्कृति के आधार ह, से सहमत लउकत बाड़न हमनी के तथाकथित लिबरल समाज वैज्ञानिक आ मीडिया के धूर्त ठग आ झूठा हिन्दूवन आ हिन्दू धर्म के लगातार गरियावत थाकत नइखन. एहमें से कुछ के त इहो मालूम नइखे कि कवन “बनावल” मजहब कत्ल करे करावे के शुरूआत कइलसि. राजदीप सरदेसाई पारिवारिक आदमी हउवन. कवनो बाप का तरह उहो चाहत बाड़े कि उनकर संतान ओह भारत में पलाव पोसाव जहाँ लोग सम्प्रदाय का नाम पर खून ना करत होखे. ई एगो बढ़िया विचार बा. जॉन लेनन त कहले रहन कि “संप्रदाय के कल्पनो मत करऽ”. बाकि राजदीप ओह महतारी बापन के का कहीहें जे खुलेआम भगवान राम के “डिवाइन इन्क्रोचर” कहत गरियावत बाड़े? ई नवहियन के का सिखावत बा जब केहू कहत बा कि हिन्दूस्तानी मरद कुरूप होले ? ओह संपादक के का कहीहें जे हिन्दू विरोधी चैनल चलावत बा? ओह संपादक का बारे में का कहीहें जे पिछला छह महीना...

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पाप के कमाई

– ओम जी ‘प्रकाश’ रंडी, पतुरिआ का उपर फूंकाई! चोरी क पइसा त चोरी में जाई!! तिकड़म भिड़ा लिहलऽ, धन त कमा लिहलऽ मड़ई का जगहा तूँ कोठी उठा लिहलऽ नोकर आ चाकर से गाड़ी आ मोटर से दुअरा प मेला बा चमचन के रेला बा बाकिर ना अँखिया में बाटे उँघाई! चोरी क पइसा त चोरी में जाई!! भइल जवानी में सई गो बेमारी बा नीमक से यारी ना चीनी से यारी बा सूगर दबावेला बीपी धिरावेला जेवना परोसल बा मुसकिल भकोसल बा रोटी ले बेसी तूँ खालऽ दवाई! चोरी क पइसा त चोरी में जाई!! तहरा से लाख गुना नीक बा करीमना चोकर के लिट्टी, ना भाजी, ना तियना टमटम चलावता जाँगर डोलावता कुंजी ना ताला बा ठनठन गोपाला बा का केहू ओकर ले जाई, चोराई! चोरी क पइसा त चोरी में जाई!! ओम जी प्रकाश, जूनियर टीचर गवर्नमेण्ट मिडिल स्कूल, मेबो, वाया पासी घाट, ईस्ट सियांग, अरुणाचल प्रदेश. मोबाइल...

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बाहुबली

– शशि प्रेमदेव हे बाहुबली! बँहिआ में त हमहन के भी ओतने दम बा! बाकिर तहरा पाले लाठी, भाला, बनूखि, गोली, बम बा!! तहरे चरचा बा घरे घरे बाजे सगरो डंका तहरे काहें ना जोम देखइबऽ तूँ तहरा पेसाब से दिआ जरे चउकी से ले के चउका तक, तहरे त फहरत परचम बा!! ऊपर से केतना निर्मल तू भीतर कल छल के जंगल तू जग बूझे बाहुबली बाकिर हरमेस रहेलऽ चिहुँकल तू जहँवे लउके झाड़ी झूंटा, तू सोचलऽ बइठल जम बा!! सम्मान बचवले बानीं हम ईमान बचवले बानीं हम ए कलजुग में इहे एगो सामान बचवले बानी हम अवगुण में आगे बाड़ऽ तू, बाकिर गुण तहरा में कम बा!! हम झंझट के भरसक टालीं झूठो मूठो ना अझुरालीं तू तिकड़म कऽ मेवा खालऽ हम मेहनत के रोटी खालीं पटरी ना बइठी हमनी में, ना तन सम बा ना मन सम बा!! रोवत सुसकत मरि जइबऽ तू बबुआ बहुते पछतइबऽ तू माटी के देहि लरकि जाई सोचऽ कइसे ढो पइबऽ तू पीठी तहरा लादल बोझा, कुकरम के भारी भरकम...

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गुजरात में कांग्रेस के हार के जिम्मेदार सोनिया बाड़ी

हिन्दुस्तान टाइम्स पर अपना ब्लॉग में स्वतंत्र पत्रकार आकार पटेल लिखले बाड़न कि कांग्रेसी वोटरन के भल ही नीक ना लागे बाकिर गुजरात में कांग्रेस के हार के जवाबदेही सोनिया पर होखे के चाहीं. काहे कि उहे अपना राजनीतिक सचिव अहमद पटेल के गुजरात में दखल देबे के इजाजत दिहले बाड़ी. अहमद पटेल साल चौरासी का बाद से आजु ले चुनाव नइखन लड़ल आ उनुका गुजरात के जमीनी हकीकत के पते नइखे. बाकिर सोनिया गाँधी के दरवान, बिना उनुका अनुमति केहू सोनिया से मिल ना सके, जइसन ताकत राखे वाला अहमद पटेल राज्य के राजनीति में लगातार दखल देत रहेलें. भरूच से आवे वाला अहमद पटेल अठाइस साल से गुजरात में चुनाव ना लड़ला का बावजूद राज्य के राजनीति के छोड़ले नइखन. सोनिया गाँधी के कृपा से उनुका के राज्यसभा के सदस्य बनवले राखल जाला आ ऊ राज्य में केहू के पनपे ना देसु. गुजरात में लगातार पैंतीस से अड़तीस फीसदी वोट लेत रहला का बावजूद कांग्रेस ओहिजा बीस बरीस से हारत आवत बिया काहे कि गुजरात के राजनीति दू ध्रुव में समेटा गइल बा आ दस फीसदी के अंतर भाजपा के बड़हन जीत दिआवे खातिर बहुते बा. आ भाजपा के पकड़ ओहिजा के स्थानीय समुदायन पर बहुते बढ़िया बा. दोसरा तरफ कांग्रेस के स्थानीय नेतृत्व अहमद पटेल का चलते अपाहिज बनि के रहि जाला आ नरेन्द्र मोदी जइसन राजनीतिक हस्ती का सोझा ऊ लोग हर बेर बिला जाला....

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मोदी के चिट्ठी काहे लिखले सैयद शहाबुद्दीन

टाइम्स आफ इंडिया पर अपना ब्लॉग में एम जे अकबर एह सवाल के उठावत लिखले बाड़न कि ठीक बा कि एगो पेड़ जंगल ना बनावे बाकिर जब कवनो सैद्धान्तिक चिरई झाड़ी से झाँके त पता लगावल जरूरी हो जाला कि मौसम बदले वाला बा का. आ ई चिरई त भगवा रंगाइलो नइखे. तीसेक साल पहिले जब सैयद शहाबुद्दीन विदेश सेवा के आपन शानदार नौकरी छोड़ के राजनीति में उतरल रहलें त ऊ इस्लामिक हरियर रंग में रंगाइल रहलें. रंग अबहियों बदलल नइखे से जब ऊ आजु के मुसलमान राजनेतन के नफरत के निशान पर रहत नरेन्द्र मोदी के चिट्ठी लिखलें त ई खबर बावे. अकबर साहेब आगा लिखत बाड़न कि एहू ले खास बात कि शहाबुद्दीन के खंडन लेटरहेड ले के आइल चिट्ठी में लिखल बात खातिर ना. इहे चरचा करत आगे बतवले बाड़न कि आज मुसलमान नरेन्द्र मोदी के माफ करे ला तइयार बाड़े बशर्ते मोदी अपना गलती ला माफी माँग लेसु, भुक्तभोगियन के मुआविजा मिल जाव आ अपराधियन के सजा. एम जे अकबर के कहना बा कि जब मुसलमानन के प्रतिनिधि राजनेता होखे क दावा करे वाला मनई एह तरह के चिट्ठी लिखे त साफ हो जात बा कि आजु मुसलमान माने लागल बाड़न कि नरेन्द्र मोदी ओह लोग का तरफ अंगुरी ना हाथ बढ़ावत बाड़न. आ दोसर ई कि अब मुसमलमान मानस माने लागल बा कि नरेन्द्र मोदी से बातचीत कइल जा सकेला. अकबर साहेब का...

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मैथिली भोजपुरी अकादमी दिल्ली के चार दिनी संगोष्ठी

‍- सान्त्वना दिल्ली सरकार के मैथिली भोजपुरी अकादमी ३ नवंबर से ६ नवंबर ले रवीन्द्र भवन, मंढी हाउस, के कौस्तुभ सभागार में चार दिन के संगोष्ठी आयोजित कइलस. एह स्तरीय आ सार्थक आयोजन में शामिल भोजपुरि मैथिली साहित्य प्रेमियन आ साहित्यकारन के उछाह देखि के लागल कि अकादमी अपना पिछला कार्यशैली से अलग हटि के, वाकई मातृभाषा में लिखल साहित्य का प्रति गंभीर आ जागरूक भइल बिया. एह सफल आयोजन पर आखिरी दिन डा॰ प्रमोद कुमार तिवारी अकादमी के सचिव आ उनुका स्टाफ के सराहना करत कहलन कि, “मैथिली भोजपुरी गीत प्रकृति आ लोक के तरल आत्मीय रिश्ता का सहारे लोकजीवन के जियत जागत साक्षात्कार करावे मे समर्थ बा. मैथिली आ भोजपुरी दुनु समर्थ भाषा हई सन , इन्हनी के उर्वर परंपरा हिन्दी के समृद्ध करत आइल बिया. एकरूपता के माँग करत रहे वाला एह बाजारवादी समय में एह लोकभषन के बचावल, अपना भाषाई विविधता आ अपनो के बचावल होई.” पहिला दिन ३ नवंबर के “मैथिली साहित्य आ बाबा यात्री” विषय पर संगोष्ठी के अध्यक्षता प्रसिद्ध नाटककार महेन्द्र मंगेलिया कइलन. वीरेन्द्र मलिक आ डा॰ देवशंकर नवीन आपन विचार रखलन. कवि रमन सिंह कार्यक्रम के संचालन कंइलन. दुसरा दिने “भोजपुरी साहित्य आ रघुवीर नारायण” विषय पर संगोष्ठी के शानदार संचालन करत वरिष्ठ पत्रकार ओंकारेश्वर पाण्डे डा॰ रघुवीर नारायण के जीवन से जुड़ल कई प्रसंगन के चरचा करत डा॰ प्रमोद कुमार तिवारी के आलेख पाठ खातिर आमंत्रित कइलन. तिवारी जी भोजपुरी...

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बतकुच्चन ‍ – ८७

हादसा के दोस नइखे, हदस से मर गइल लोग. आजु जब बतकुच्चन करे बइठनी त पिछला हफ्ता छठ के दिन पटना में भइल हादसा याद पड़ गइल. ओह हादसा का बाद बयान देत मुख्यमंत्री के कहना रहल कि मौत हादसा का चलते ना भइल. लोग हदस में भाग चलल आ ओह भगदड़ में लोग के जान चलि गइल. एहिजा ओह बयान पर कुछ लिखला बोलला से कवनो फायदा नइखे काहे कि मन अनसा जाई लिखे पढ़े में. प्रशासन अनेसा बचावे खातिर लागल रहेला बाकिर कोशिश रहेला कि कवनो तरह कुछ मालो बनावे के मौका मिल जाव. टेम्पोररी काम करावले एह ला जाला कि केहू के परमानेंट बंगला मैंशन बन जाव. डेढ़ करोड़ के खरचा पर शामियाना लागले रहुवे कुछ महीना पहिले पीएम खातिर. से चचरी के पुल बनावले एह ला गइल. ना त कुछ अधिका खरचा कर के पीपा के पुल बन गइल रहित. खैर चचरी ओह चीझु के कहल जाले जवन चरचराय. चचरी के पुले ना बने आड़ आ बाड़ो बनेला. बाँस के चीर के पातर पातर चचरा निकाल के चचरी बनावल जाला. अब ओह चचरी के पुल बना लीं भा दीवाल ई रउरा पर बा. दीवाल माने कि आड़ भा बाड़ बना लिहनी त ओकरा से त चरचराए के आवाज ना आवे जब ले तेज हवा बतास ना बहे बाकिर चचरी के पुल पर जब लोग चलेला त ऊ चरचरात रहेला. अकेला आदमी के ओह पर चले...

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सब कुछ ठीक बा

– जयंती पांडेय राम चेला बड़ा चिंता में बाबा लस्टमानंद के लगे अइले आ थहरा के बइठ गइले. बाबा पूछले कि उनका कवना बात के चिंता बा कि उनकर चेहरा उड़ल बा. राम चेला कहले, का कहीं बाबा कांग्रेस त पहिलहीं घोटाला में डूबल रहे अब भाजपो ओही पांक में फसल लउकऽतिया. बाबा कहले, बिलकुल ना. गुरुमूर्ति जी के सुनलऽ ना? ऊ बहुत बड़हन एकाउंटेंट हउवन आ सी ए हउवन. कहऽतारे कि एकदम खाता बही के जांच क लेहले बाड़े. कवनो गड़बड़ी नइखे. पाई पाई के हिसाब ठीक बा. गडकरी जी पर त बेकारे आरोप मढ़ऽता लोग. तूं तनिको मन छोट मत करऽ. आउर जे ऊ नोकर डराइवर वगैरह के अपना कम्पनी के डायरेक्टर बनाइये दिहले त एह में कवन खराब भइल? ई त संघ के आ दीनदयाल उपाध्याय के विचारधारा के मोताबिके बा. एह से गरीब लोग के शक्ति मिली. एकर त बड़ाई करे के चाहीं इहवां लोग ओकर बुराई करऽता. नेता लोग अपना भाई भतीजा , दोस्त-महीम सबके पद बांटेला आ ऊ बेचारू त गरीबन के दिहले त नेता लोग के पेट दुखाये लागल. ऊ लोग एह से डेराता कि अब जनता जे उनकर ई काम के बड़ाई करी त ऊहो लोग के इहे करे के होई. त भाई भतीजा का खाई? आजादी के बाद राजा- नवाब-जमीदार लोग कुल जगह-जमीन अपना कुकुर-बिलार के नावें करत रहे लोग त कवनो बात ना लेकिन जे गडकरी जी करे लगले...

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