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Category: देश आ समाज

सियासत में भाई भतीजावाद

– ‍हरिराम पाण्डेय उत्तर प्रदेश एह घरी भारत के सियासत के ड्राइंगबोर्ड बन के बइठल बा. एकरा अलग अलग हिस्सा पर अलग अलग गोल तरह तरह के चित्र बनावे में लागल बाड़ें. कांग्रेस प्रगतिशील उदार ब्राह्मणवाद के हवा देत बिया, त भाजपा...

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‘हम’ पूजक भोजपुरियन के सेवा भाव

– प्रमोद कुमार तिवारी हमनी के ई बतावत कबो ना थाकेलीं कि भोजपुरी एगो अइसन भाषा हऽ जवना में ‘मैं’ हइए ना हऽ, एहमें खाली ‘हम’ होला. मैं आ हम में सबसे बड़ अंतर तऽ इहे होला नू कि ‘मैं’ खाली अपना बारे में सोचेला, जबकि ‘हम’ सबकर...

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अपना मूल के जनला समझला के माने

– डा. अशोक द्विवेदी गँवई लोक में पलल-बढ़ल मनई, अगर तनिको संवेदनशील होई आ हृदय-संबाद के मरम बूझे वाला होई, त अपना लोक के स्वर का नेह-नाता आ हिरऊ -भाव के समझ लेई. आज काकी का मुँहें एगो जानल-सुनल पुरान गीत सुनत खा हम एगो दोसरे...

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देवलास : अदभुत धार्मिक स्‍थल

– देवकान्त पाण्डेय उत्‍तर प्रदेश के मऊ जिला के मुहम्‍मदाबाद गोहना तहसील में मऊ शहर से करीब 28 कि.मी. दूर आजमगढ़-मुहम्‍मदाबाद गोहना-घोसी रोड पर स्थित देवलास मऊ जिला के प्रमुख पर्यटक स्‍थलन में गिनल जाला. देवल ऋषि के...

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दू नाव पर पैर रखला पर जिनगी ना चली.

– अभय कृष्ण त्रिपाठी “विष्णु” एक व्यक्ति दू नाव पर सवारी, कइसे ? समस्या विकट बा आ ओहु से विकट बा ओकर समाधान. सबसे बड़ बात ई कि समाधान के चिंता केहु के नइखे काहे से कि आज हर केहु जेतना ज्यादा मिल जाये ओतना नाव पर...

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केकरा पर करीं हम गुमान रामप्यारे !

– शिलीमुख उनइस बरिस पहिले हम प्रसिद्ध कवि चन्द्रदेव सिंह क एगो रचना पढ़ले रहलीं. साइत 1997 में “पाती” अंक -२३ में छपल रहे. बरबस आज ओकर इयाद आ गइल बा त रउवो सभे के पढ़ा देत बानी – केकरा प’ करब s गुमान...

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भारत के बढ़न्ती ला भारते के भाषा जरूरी काहे ?

भारतीय जीवन के बहुते खास क्षेत्रन में अंग्रेज़ी भाषा के दखल से भारत के बड़हन नुकसान होखत बा. एह दखल का पाछे सबले बड़हन कारण बा कुछ गलतफहमी जवन हमनी के दिलो-दिमाग में बस गइल बा भा बसा दिहल गइल बा. ई गलतफहमी हई सँ – 1....

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माईभासा दिवस पर एक से एक नमूना

काल्हु दुनिया भर में माईभासा दिवस मनावल जाई आ लोग अपना अपना माईभासा के पुरहर, समहर, मजगर बनावे के जोड़ जुगत में लागत आपन आपन आयोजन करी. भोजपुरी के मठाधीशो लोग जगहे जगह आयोजन करे वाला बा. एह आयोजनन के एकाध बोलहटा हमरो लगे चहुँपल...

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‘लोक’ के आधुनिकता बनाम यांत्रिक आधुनिकीकरण

– डा. प्रमोद कुमार तिवारी लोक के नाँव लेहला पऽ मन में ओकर दू गो छवि बनेला. एगो छवि में कलकल नदी बहेले, फल से गदराइल पेड़ लउकेला, गीत आ उत्सव से भरल खुशहाल लोग नजर आवेले आ हरियाली भरल खेत के बीच से कच्चा पगडंडी पऽ पोंछ उठा...

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भिखारी ठाकुर के जयन्तिओ का दिने सून पड़ल रही उनकर गाँव

भोजपुरी के लोकचितेरा कवि, नाटककार, समाज सुधारक भिखारी ठाकुर के जयंती एह साल उनका गाँवे कवनो समारोह नइखे होखत. पहिला बेर वाराणसी में भिखारी ठाकुर के जयन्ती समारोह आयोजित होखत बा. भिखारी ठाकुर के जनम सारण जिला के दियरा इलाका के...

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सूचना

अँजोरिया प 25 मई 2017 के बाद प्रकाशित हर पोस्ट प आपन टिप्पणी भोजपुरी में लिखे के आदत डालीं त रउरा एगो इनामो जीत सकीलें.

25 जनवरी 2018 ले कम से कम 100 टिप्पणी डाले वालन में सबले बेसी टिप्पणी डाले वाला पाठक के पाँच हजार रुपिया के इनाम दीहल जाई.

हर टिप्पणी प्रकाशित करे जोग होखे के चाहीं. अनर्गल टिप्पणी डाले वाला के प्रतिबन्धित क दीहल जाई.

हर टिप्पणी कम से कम 60 शब्द के होखे के चाहीं.

भारत का बाहर इनाम भेजल संभव ना होखी. एह से इनाम ला भारत के पता होखल जरुरी बा.

बिना लॉगिन कइले टिप्पणी ना डा़ल सकब. एहसे लॉगिन कइल जरुरी बा आ बाद में एह लॉगिन मेल के बदलल ना जा सकी. ओही मेल से भेजल पता प इनाम भेजल जाई.



देवी गाथा “कहनिया दुर्गा माई के” दुर्गा सप्तशती की प्रामाणिक कथा की एक मौलिक एवं सुमधुर प्रस्तुति है। इसे भोजपुरी भाषा की सहज और सरल शैली में लिखा और गाया है डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल ने।


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