हमार जान ह भोजपुरी

April 16, 2018 Editor 0

– डॉ. हरेश्वर राय हमार सान ह हमार पहचान ह भोजपुरी, हमार मतारी ह हमार जान ह भोजपुरी। इहे ह खेत, इहे खरिहान ह इहे […]

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होली ह भाई होली ह

February 28, 2018 Editor 0

– तारकेश्वर राय जोगीरा सा रा रा रा … राब गुर त भेटाते नइखे, महंग भइल चाउर ।। बी.पी.एल. के कारड लेके, झनकऽ का करबऽ […]

फगुवा ह फगुवा

February 13, 2018 Editor 0

– तारकेश्वर राय पुरनकी पतईया, फेड़वा गिरावे । जइसे गिरहथ, कवनो खेतवा निरावे ।। नइकी पतइया बदे, जगहा बनावे । जाए के बा एक दिन, […]

सांवरिया आ जइतऽ एक बार

February 13, 2018 Editor 0

गीतकार- लाल बिहारी लाल स्त्री स्वर- सांवरिया आ जइतऽ एक बार अंखियाँ कब से राह निहारे, नैना तरसे हमार सांवरिया आ जइतऽ एक बार…. पानी […]

शिलीमुख के कबिताई

February 2, 2018 Editor 0

– शिलीमुख जेकरा पर बा तोहके नाज ओकरे से बा बिगरत काज ! अँइचा के ऊजर ना लउके आन्हर के सूघर ना लउके सब बाउर, […]

प्रसुति घर

January 14, 2018 Editor 0

– डॉ. कमल किशोर सिंह सुन्दर सरोबर हो कि कौनो पंक दल-दल , पता केकरा बा कि कहँवा खिली एगो कमल शतदल। कठिन बा ई […]

मईया लछिमी तू मड़ई में अइतू

October 19, 2017 Editor 0

– हरीन्द्र हिमकर मईया लछिमी तू मड़ई में अइतू दुअरिआ पर दिअरी सजइतीं मड़ई में अइतू त चटइ बिछइतीं गाइ का गोबरा से अंगना लिपइतीं […]

बिहंसs दुल्हिन दिया जरावs

October 19, 2017 Editor 0

– हरीन्द्र ‘हिमकर’ बिहंसs दुल्हिन दिया जरावs कुच -कुच रात अन्हरिया हे। नेहिया के बाती उसकावs बिहंसो गांव नगरिया हे। तन के दिअरी,धन के दिअरी, […]

दुमुंहा

October 16, 2017 Editor 0

– जयशंकर प्रसाद द्विवेदी ललछौंहा कवनों फोड़ा टीसत रहे कुलबुलात रहलें चोरी चुपके परजीवी कृमि चीरा लगते अंउजाइल बहरियाए लगलें । तीखर घामे दँवकल भीत […]

जाने कवन राहे अइहें

August 26, 2017 Editor 0

– प्रिन्स रितुराज छन छन छनके आहट सुन के मन गचके जाने कवन राहे अइहें इहे सोच के मन खटके. आदत अइसन उनकर भइल बिना […]

फहरावs तिरंगा

August 14, 2017 Editor 0

फहरावs फहरावs तिरंगा आसमान में फहरावs । केसरिया के अमर सनेसा शान्ति रहो सुख चैन रहो तप के धनी रहो ई धरती प्रेम मगन सब […]

सावन -सिसक गइल बा

August 6, 2017 Editor 0

– डॉ राधेश्याम केसरी ढहल दलानी अब त सउँसे, पुरवइया क झांटा मारे, सनसनात ठंढा झोका से, देहिया काँप गइल बा। मेजुका-रेवां गली- गली में, […]

सब दारू पी गइल

June 4, 2017 Editor 0

– लव कान्त सिंह “लव” फाटल रहे गुदरा-गुदरी एक्के बेर में सी गइल मार मुस – पियना के सब दारु पी गइल । दरोगा जी […]

का लिखीं बुझाते नइखे

May 7, 2017 Editor 1

– लव कान्त सिंह “लव” कुछो अब सोहाते नइखे, का लिखीं बुझाते नइखे। नेता कोई गद्दार लिखीं, डाकू के सरदार लिखीं, चोर के पहरेदार लिखीं, […]