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Category: कविता

माई

– डॉ राधेश्याम केसरी हमरे से खनदान पटल बा, जिनिगी से जज्बात जुड़ल बा हम हमार, घर दुअरा खातिर...

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गीत

– शिवजी पाण्डेय ‘रसराज’ हम गरीबने पर अइसन, अन्हेर काहें? देहि धुनलो पर खइला में देर काहें?...

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गजल

– अशोक कुमार तिवारी हो गइल छीछिल छुछुन्नर, दिल कहाँ दरियाव बा, अब उठावे ना, गिरा देबे में...

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सूचना

अँजोरिया प 25 मई 2017 के बाद प्रकाशित हर पोस्ट प आपन टिप्पणी भोजपुरी में लिखे के आदत डालीं त रउरा एगो इनामो जीत सकीलें.

25 जनवरी 2018 ले कम से कम 100 टिप्पणी डाले वालन में सबले बेसी टिप्पणी डाले वाला पाठक के पाँच हजार रुपिया के इनाम दीहल जाई.

हर टिप्पणी प्रकाशित करे जोग होखे के चाहीं. अनर्गल टिप्पणी डाले वाला के प्रतिबन्धित क दीहल जाई.

हर टिप्पणी कम से कम 60 शब्द के होखे के चाहीं.

भारत का बाहर इनाम भेजल संभव ना होखी. एह से इनाम ला भारत के पता होखल जरुरी बा.

बिना लॉगिन कइले टिप्पणी ना डा़ल सकब. एहसे लॉगिन कइल जरुरी बा आ बाद में एह लॉगिन मेल के बदलल ना जा सकी. ओही मेल से भेजल पता प इनाम भेजल जाई.



देवी गाथा “कहनिया दुर्गा माई के” दुर्गा सप्तशती की प्रामाणिक कथा की एक मौलिक एवं सुमधुर प्रस्तुति है। इसे भोजपुरी भाषा की सहज और सरल शैली में लिखा और गाया है डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल ने।


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