भोजपुरी के सेवा में

भोजपुरी जिनिगी अपना चउथका साल में नाम बदल लिहले बा. अब एकर नाम हो गइल बा “भोजपुरी जिंदगी. नयका अंक में पत्रिका के संपादक उहे बाति लिखले बाड़न जवन आजु का दिन हर भोजपुरी मीडिया के पीड़ा बा. संपादके का सब्दन में पढ़ीं त, “नाम में कुछ बदलाव हो गइला से भोजपुरी भासा के सेवा भाव में बदलाव ना होई. ओइसे अब सेवा सब्द आपनमूल भाव से कट रहल बा. साहित्य में कम राजनीति में जादे. भोजपुरी जिन्दगी के उद्देश्य बस भोजपुरी माई के सेवा बा. आर्थिक लाभ के कवनों आशा नइखे. उमेदो नइखे लउकत काहे कि आजुओं पढ़वइया लोग चाहेले कि पत्रिका पढ़े ला पाकिट ढीला ना होखे के चाहीं.”

पत्रिका के नयका अंक आजु अँजोरिया पर पोस्ट कर दिहल गइल बा. डाउनलोड कर के पढ़ीं.

अँजोरियो के आमदनी से उरेज नइखे बाकिर “मजबूरी के नाम महात्मा गाँधी” वाला अन्दाज में अपना काम में लगलो रहे में कवनो असकत नइखे. समय का साथे अगर हमनी का अपना में बदलाव ना ले आइब जा त पीछे त छूटही के बा. आजु के नयकी पीढ़ी कागज पर कम नेट पर बेसी लिखे पढ़ेले. प्रिंट का मुकाबिले नेट पर प्रकाशन के खरचो कम बा आ दायरो पूरा दुनिया ले पसर जाले.

अँजोरिया अपना माध्यम से “पाती” आ “भोजपुरी जिनगी” के नेट पर खुशी खुशी वितरित करेले. दोसरो प्रकाशक चाहसु त आपन प्रकाशन मुफ्त वितरण खातिर दे सकेले. पइसा वइसहूं नइखे भेंटाये के अइसहूं ना. ता काहे ना अपना प्रकाशन के दायरा पूरा दुनिया ले फइला दिहल जाव. अगर प्रिंटे ले सीमित रह गइनी त जंगल में मोर नाचा के देखा वाली हाल हो जाई.

कुछ दिन पहिले हम भोजपुरी के दैनिक अखबार निकाले खातिर कोशिश कइले रहनी. एगो बंधु मिलले जे तइयार रहले बाकिर बाद में महटिया गइले आ हमहू उनका पाछा ना पड़नी. सोचनी कि का फायदा. अपना बेंवत भर बेसी त ना सही बाकिर एके पन्ना के आनलाइन भोजपुरी समाचार माध्यम का रूप में टटका खबर के जिंदा रखलही बानी. कुछ लोग नियमित अइबो करेला बाकिर ओतना ना जतना सिनेमा वाला खबर खातिर. साहित्य का तरफ झाँकहू लोग कमही आवेला. एह हालत में भोजपुरी के कतना सेवा हो पाई सोचल जा सकेला. बाकिर गीता में भगवान कृष्ण के दिहल उपदेश हमेशा ध्यान में रखले काम में लागल बानी कि “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन”. तोहरा हाथ में बस काम कइल बा. फल के चिंता मत करऽ.

से लागल रहीं, घर के आटा गील कर के भोजपुरी के सेवा करत रहीं. मत सोंची कि केहू दोसर रउरा काम में हाथ बटावे आगे आई.
जात जात इहो कहल चाहब कि आदत लगाईं आपन राय देबे के. कमेंट कइला में कुछ लागे के नइखे. वोट दिहला में कवनो खरचा परेशानी नइखे. से कइल करीं कि हमरो लागो कि मेहनत कामे आ रहल बा. लोग एकर स्वाद ले रहल बा.

राउर,
संपादक, अँजोरिया

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17 Comments

  1. नमस्कार आपो कमाल के लिखत बानी RANA RANJEET BASU DHARANI GHAZIPUR UP BHOJPURI UTTHAN MANCH

  2. Santosh bhaiya delhi admn me bhi aapan bhai log ke kauno kami naikhe bakir jarurat ba sab log ke sath leke chalal. akuno aisan upai batai ke sab bhai log ek dusra ke madad kare log. delhi admn apan paith banawal jaruri bate

  3. dear santosh Bhai,
    it is very nice to see your magazine and i appreciate your contribution made for the growth of Bhojpuri language. Best wishes for all the future assignment.

  4. भोजपुरी साहित्य के समर्पित पत्रिका भोजपुरी जिंदगी के स्वागत बा.
    संपादक जी के बधाई
    युगुल किशोर द्विवेदी
    प्रेसीडेन्ट : पूर्वांचल जन शक्ति (र. )

  5. प्रिय संतोष जी,
    अंजोरिया में आपके द्वारा भोजपुरी में अनुदित “फुलौना” कहानी पढ़कर बहुत हर्ष का अनुभव हुआ। आप इतना सुन्दर व सटीक अनुवाद करने की दक्षता रखते हैं, उसके लिए आप बधाई के पात्र हैं। आपका अपनी भाषा के प्रति ऐसा डेडिकेशन,जुनून और अपना सबकुछ दाँव पर लगा, भोजपुरी भाषा को एक विशिष्ट मक़ाम पर लाने की लगन व उसके लिये अथक परिश्रम से जुटे रहना। आप सबके लिए एक उदाहरण हैं, रोल मॉडेल हैं। आपके इस प्रयास को मेरा नमन। आप आगे भी ऐसा ही अच्छा काम करते रहें, यही मेरी कामना है। अंजोरिया को बधाई, इतनी सुन्दर वेब्साईट चलाने के लिए। इस मीठी भाषा के पाठकों को भी मेरा नमस्कार।
    शुभकामनाओं सहित,
    अमृता बेरा

  6. संतोष जी,
    सप्रेम नमस्कार,
    आपके द्वारा संपादित त्रैमासिक पत्रिका “भोजपुरी जिंदगी” का वर्तमान अंक पढ़ा. पत्रिका सचमुच आम आदमी के जिंदगी का आईना है| इसकी सारी रचनाएँ प्रेरक है| आशा है कि आपके सम्पादन में यह पत्रिका पूरे संसार को समेटने में सक्षम होगी| हमारी ईश्वर से विनती है कि आपको सदा स्वस्थ एवं सुखी रखे जिससे भोजपुरी एवं भोजपुरिया संस्कृति लताओं जैसी दिन दूना रात चौगुना फूलती-फलती रहे| अंजोरिया डोट कॉम का भोजपुरी के प्रति समर्पण काबिले तारीफ़ है| कन्या भ्रूण हत्या जैसी कुरीतियों को समूल नष्ट करने के लिए पत्रिका के अंक में भाई नवल किशोर सिंह “निशांत” जैसे लोक कल्याणकारी कवियों की रचनाओं को शामिल करके आप समाज के मानस-पटल पर एक अमिट छाप छोड़ने में कामयाब दिखते है|
    मेरी हार्दिक शुभकामनायें!!
    आपका
    नीरज कुमार (शिक्षक)
    दिल्ली-110036

  7. “भोजपुरी जिंदगी” त्रैमासिक पत्रिका के हाल फिलहाल के अंक देख के हियरा जुड़ा गईल. पत्रिका में शामिल रचनन के पढ़ के दिल दरियाव हो गईल. एमें के कविता , कहानी, लेख आदि खाली मनोरंजने नईखे करत बलुक आदमी के जिनगी में व्याप्त समस्या के उजागर करके ओकरा निदान वास्ते चिंतन-मनन खातिर प्रेरित करत बा. हमरो किताब “बेटी के विनती ” के एगो कविता के पत्रिका में स्थान देके युवा सम्पादक श्री संतोष पटेल जी हमरा मिशन के पूरा करावे में सहृदयता देखवले बानी. एकरा खातिर बेटी बचाओ मिशन से जुडल सभी लोग का दिल में कवि, साहित्यकार आ सम्पादक श्री संतोष पटेल जी बस गईल बानी. “भोजपुरी जिंदगी” पत्रिका, अइसन मेहनती आ जुझारू सम्पादक का देख-रेख में भोजपुरी जगत के पत्रिकन में एगो मील के पत्थर सिद्ध होई एमें इचिको संदेह नइखे.
    भोजपुरी आ भोजपुरिया संस्कृति के विस्तार देके मंजिल तक पहुँचावे वाली वेबसाइट अंजोरिया डोट कॉम के बड़ाई खातिर हमरा पास शब्द नईखे. गाँव-गँवई आ आम देहाती के पहचान से जुड़ल भाषा भोजपुरी के धरती से आसमान तक पहुँचावे में अंजोरिया डोट कॉम सूरज के भूमिका निभा रहल बा. एकरा खातिर हमार हार्दिक शुभकामना बा.
    नवल किशोर सिंह “निशान्त”
    साहित्यकार(हिंदी,भोजपुरी)
    संपर्क- बी-४१७/५८ गली न. ५ लक्ष्मी विहार
    (नियर पारुल गैस गोदाम)
    बुराड़ी दिल्ली-११००८४

  8. Lage raho santosh bhai… I really proud of you and also feeling so. ■Today I realised your true potential and my faith in you has increased in leaps and bounds. Hope you continue to keep up the fantastic job that you are doing.
    Good day!

  9. anjoriya ka july ka ank padhha,vividhh tatha rochak samagri hai.bhojpuri ke pathhakon se ek lekhak ki tarah is ank ke madhyam se pahla parichay hai. is ank me meri hindi kahani ”gubbara” ka bhojpuri anuvad ,”fulouna” chhapa hai. Santosh ji ne sachmuch bahut sundar aur sajiv anuvad kia hai.Is kahani ka angreji me anuvad Amrita Bera ne kia hai jo U.S. ki ek magazine ANJALI ME chhapa hai tatha bangla anuvad Chitra vasu malik ne kia hai jo ”HANIYAN O ANANYO GULP” me sangrahit hai.Is ank ke madhyam se ANJORIA ke pathakon ko pranam aur ANJORI parivar ko badhai va shubhkamnaen. VIVEK MISHRA

    • adarniya Vivek ji

      mai aapko awam Amrita Bera ji ko dhanyabad deta huan jo bhojpuri bhasa sahitya me aapni ruchi dikhalee.
      mai swyam aapki kahani padhte padhte bhawuk ho utha…
      man ko jhakhjhor ke rakh diya tha ….. dhanyabad hausla badhane ke liye
      santosh patel

  10. Dear brother santosh,

    raur kitab padhni aur bhoot acha lagal, hamni kay chahila ki bhojpuri bhasa kay vikas hoibak chahi. hamni kay gar may maithili bolila aur yar dost jo bhogpuri barai unka sang bhogpuri,

    maithili may ;-
    hum sab mithila chor ke 115 sal pahilay bangal chal gel chi, laking bengali bhasa maay sikha lelak bado meithili our bohogpuri bagaith chi.

    thi lal hamar aha sab sa anuroth achi jay apas may hor nahi laga kay yaadi dunu bhasa kay uthan lal karya kail kari tay nik hoyat.

    bhojpuri may:-

    raur hamra kuno samay sampark asthapit kay sakat bani, hum raur kay adi kuno kam aa sakila to khushi haoi.

    sorry I can not wirte in devnagrik , fear of spealing mistakes

    thank with love
    shravan kumar jha

    • adarniya sharvan bhaiya
      bahut bahut dhanayabad, raur hamar haulso bahdwani aa bhojpuri ke ee prem khatir ham hriday se abhar det bani.
      santosh
      editor

  11. dear santosh, it is very nice to see your latest magazine and i appreciate your contribution made for the growth of Bhojpuri language. Best wishes for the future assignment.

    Brijesh Pandey,
    Bhojpur Premi

  12. Santosh Bhaiya
    thanks for your grand contribution for propagation of bhojpuri thorugh your great effort i.e. BHOJPURI JINDAGI .
    My special thanks for anjoria website.
    BHARAT BHUSHAN
    OFFICER; RMD

  13. patrika dhirghayu ho….
    subhkamana
    Kishore Kumar Ratra
    Chief Editor : Pragyavtar/Space Age Times

  14. संपादक जी ( अंजोरिया और भोजपुरी जिंदगी)

    मै आपकी पत्रिका पढ़ा. कहानी विशेषांक इस पत्रिका में दी हुयी सारी कहानियां मर्म स्पर्शी हैं. सम्पद्किये के बहाने से भोजपुरी की जानकारी मिली उमेद कहानी भावना से ओत प्रोत लगी. सुखांत .. पानी ललित निबंध सामाजिक समस्या को दर्शाता है .बेटी बचाओ आन्दोलन के समर्थन देता नवल जी की कविता समाज के लिए एक शिक्षा है.संतोष जी का प्रो. शत्रुघ्न कुमार जी के साथ बतकही से विश्वविद्यालय स्तर पर भोजपुरी और उसके बढ़ते प्रभाव का पता चलता है. “फुलौना” एक अनुदित कहानी है परन्तु वास्तविकता के बोध करा रही है.

    पुन : पुन: धन्यवाद

    मनोज मान

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