Tag: रामरक्षा मिश्र विमल

सत्य आ धर्म का पालन के व्रत- ‘बहुरा’

– डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल भादो महीना के अन्हरिया के चौथ के बहुरा कहल जाला.कहीं-कहीं एकरा के गाइ माई के पूजा के परब मानल जाला.गाइ आपन दूध पियाके आदिमी के…

भारतीय संस्कृति के संवाहक रक्षाबंधन के अस्तित्व संकट

– डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल सावन के पुरनवासी के इंतजार हर घर के होला काहेंकि एह दिन देश भर में राखी के तेवहार मनावल जाला. राखी माने रक्षाबंधन. ई हिंदू…

जबले हरियरी रही, कजरी गवात रही

– डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल चाहे शहर होखे भा गाँव आ गाँव में त अउरी, सावन के महीना आवते शुरू हो जाला लइकन के कबड्डी, खो-खो, चीका आ फनात के मजदार खेल.…

गजल : बतावल लोग के औकात जाता रोज कुछ दिन से

– रामरक्षा मिश्र विमल शहर में घीव के दीया बराता रोज कुछ दिन से सपन के धान आ गेहूँ बोआता रोज कुछ दिन से जहाँ सूई ढुकल ना खूब हुमचल…

देवी गाथा ‘कहनिया दुर्गा माई के’

देवी गीतन के माहौल में देवी गाथा (भोजपुरी) के MP3 सीडी ‘ कहनिया दुर्गा माई के ’ नाम से बाजार में बहुत कम समय में काफी लोकप्रिय हो गइल बा.…

महाशिवरात्रि के अवसर पर

शिवभक्ति गीत – रामरक्षा मिश्र विमल सुनींले जे भोला बाबा हईं बड़ा दानी हमरो प किरिपा करीं तब हम जानीं. जानियो के भसमासुर के बरदान दिहलीं अपना बचाव खातिर भागल…

धनि बा बुढ़ौती के अइसन सिंगार

– रामरक्षा मिश्र विमल घर फूटेला अउरी लूटे जवार पीटेली माई कपार दुरगति के कवनो ना पार. अइसन पतोह एक आङन उतरलीं अपने ही हाथ पंख आपन कतरलीं भाइन का…

बरिसावऽ माँ नेह सुधा

– रामरक्षा मिश्र विमल बरिसावऽ माँ नेह सुधा कब ले जियरा छछनल। जग जीवन पर छवल निराशा लागि रहल मधि रइनि अमवसा कब ले पूरनवासी आई दया रूप उमगल। अनाचार…

विमल के दू गो रचना

– रामरक्षा मिश्र विमल (1) गीत टनटनात माथ जहर लागेला घाम हाय राम एहू पर दूब के सुतार. रउँदेले सुबह शाम घुमवइया लोग बकरी लगावेलिन ठाकुर के भोग तबहूँ ना…