– ओ.पी .अमृतांशु पाकल मोछवा बोकावा के पोंछवा रुपवा गोबरे लिपावल ! ये  दुलहा. माथे मउरवा सजावल ! ये  दुलहा. अइलऽ गदहिया पे, नाहीं तू नहइलऽ, आखीं कजरवा ना माई से करइलऽ, उबड़-खाबड़ बाटे लिलारवा चूनवा वोही पे टिकावल ! ये  दुलहा. माथे मउरवा सजावल ! ये  दुलहा . लेके दहेजवा बगलिया में धइलऽ, एको खिली पान ना मुहंवा में खइलऽ, टूटल दंतवा पचकल गलवा  होंठवा में आलतापूरा पढ़ीं…

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– डॉ. कमल किशोर सिंह उत्तर टोला बर तर, बईठल चबुतर पर, धनिया ढील हेरवावत रहे, सुबुकत सब सुनावत रहे – कतना दुःख सुनाईं बहिनी ई ना कभी ओराला, आ धमकेला दोसर झट से जसहीं एगो जाला. भादो में भोला के कसहूँ गोडवा गइल छिलाय. धान निकौनी करत रहलन ,पूरा पढ़ीं…

– ओ.पी .अमृतांशु जीतल मंगरुआ बो मुखिया चुनाव में  मचल बा हाय खलबली, देखऽ गली -गली. छाका छोड़ाई दिहलस एमे. बीए पास के  मुखिया जी खुरुपी ले के चलीं दिहलें घास के निपट-अनाड़ी भारी उठल बीया गावँ में   मचल बा हाय खलबली, देखऽ गली –गली. शोषण के मारी हारी धीरे मुसुकइली घूँघट के ओटवा के तनी सा हटइली  चऊकठ के बहरा बाजेला पायल पाँव में मचल बा हाय खलबली, देखऽ गली –गली. जुटल पंचाईत आइल केस बलात्कार के भइल मिजाजपूरा पढ़ीं…

– अभयकृष्ण त्रिपाठी कभी कभी हमरा दिल में खयाल आवेला. भोजपुरिया बानी हमरा भोजपुरिये भावेला, अंगिका, वज्जिका, मगही मैथिलि सब हमरे नगीना बा, भोजपुरी जइसन मिश्री बोलला में नाही कवनो दाम बा, भोजपुरिया के सफ़र शुरू भी भोजपुरिये से होखी, कोस कोस पर बोली बदली पर माई त भोजपुरिये होखी,पूरा पढ़ीं…

– रामरक्षा मिश्र विमल फागुन के आसे होखे लहलह बिरवाई. डर ना लागी बाबा के नवकी बकुली से अङना दमकी बबुनी के नन्हकी टिकुली से कनिया पेन्हि बिअहुती कउआ के उचराई. फागुन के आसे होखे लहलह बिरवाई. फागुन के आसे होखे लहलह बिरवाई. बुढ़वो जोबन राग अलापी ली अङड़ाई चशमोपूरा पढ़ीं…

– कैलाश गौतम प्रसिद्ध कवि कैलाश गौतम के एगो रचना उहें के आवाज में प्रस्तुत कइल जा रहल बा जवन एगो कवि सम्मेलन में पेश भइल रहे. पूरा ट्रांस्क्रिप्ट जस के तस दिहल जा रहल बा काहे कि ओकर अनुवाद के कवनो जरुरत नइखे लागत. कवि अपना कविता के परिचयपूरा पढ़ीं…

– रामरक्षा मिश्र विमल लागेला रस में बोथाइल परनवा ढरकावे घइली पिरितिया के फाग रे. धरती लुटावेली अँजुरी से सोनवा बरिसावे अमिरित गगनवा से चनवा इठलाले पाके अँजोरिया जवानी गावेला पात-पात प्रीत के बिहाग रे. पियरी पहिरि झूमे सरसो बधरिया पछुआ उड़ा देले सुधि के अँचरिया पिऊ-पिऊ पिहकेला पागल पपिहरापूरा पढ़ीं…

– ओ.पी .अमृतांशु बरसे रंगवा हुलसे मनवा , नील गगनवा रंगाइल ! महँगिया खूब ईठलाइल , आइल होली आइल रे !! मस्त फगुनवा मस्ती के दिनवा , झूमेला गेठ जोडिके सरकारवा, भइल करोडो हॉय  रे घोटाला सउँसे खजाना लूटाइल ! महँगिया खूब ईठलाइल आइल होली आइल रे !! सस्ता मोबाइल इलाज  भइल महँगा कईसे किनाई गोरी कँगना-लहँगा एसनो पावडर हॉय पूरा पढ़ीं…

– अभयकृष्ण त्रिपाठी आईल बाटे फिर से बाबा शिवरात्रि के त्यौहार, भोले बाबा सुनी लिह बिनती हमार, मत दीह केहु के भी कवनो उपहार, भोले बाबा, भोले बाबा, भोले बाबा हमार II पापियन के नाश के महिमा सुनाईले, भस्मासुर के लीला भी भूले ना भुलाईले, भरल बाटे एही गुणवा सबमेपूरा पढ़ीं…

– रामरक्षा मिश्र विमल फूटल भाग लोराइल अँखिया मन पितराइल. असरा के अङना में सपनन के आवाजाही दिन बदलल का दिल बदलल मन हो जाला घाही अलगवला पर मुहर लगल जियरा छितराइल. थथमत आवेला बसंत मन सहमे लागल बा शीशा के पँजरा जाए में सोचे लागल बा शंका हलुक बेमारीपूरा पढ़ीं…

– ओ.पी .अमृतांशु जा रे झूम के बसंती बहार  पिया के मती मार पिया बसेला मोर परदेसवा में . सरसों के फुलवा फुलाईल आमवा के दाढ़ मोजराईल , अंगे-अंगे मोर गदाराइल हाय!उनुका ना मन में समाईल , लाली होठवा भइल टहकार पिया के मती मार पिया बसेला मोर परदेसवा में . जब -जब कूहके कोयलिया  कहीं कईसे मनवा के बतिया , लयपूरा पढ़ीं…