बोले-बतियावे से आगा / पढ़े-पढ़ावे के जरूरत !

January 26, 2018 Editor 0

– अशोक द्विवेदी लोकभाषा भोजपुरी में अभिव्यक्ति के पुरनका रूप, अउर भाषा सब नियर भले वाचिक (कहे-सुने वाला) रहे बाकिर जब ए भाषा में लिखे-पढ़े […]

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पाण्डेय कपिल : जिनिगी के हिसाब

January 16, 2018 Editor 0

– भगवती प्रसाद द्विवेदी भोजपुरी आन्दोलन के संगठनात्मक अगुवाई आ सिरिजना के अभूतपूर्व ऊँचाई देबेवाला शख्सियत के नाँव ह – आचार्य पाण्डेय कपिल। एक ओर […]

मानिक मोर हेरइलें

January 14, 2018 Editor 0

– आचार्य विद्यानिवास मिश्र भोजपुरी में लिखे के मन बहुते बनवलीं त एकाध कविता लिखलीं, एसे अधिक ना लिखि पवलीं। कान सोचीलें त लागेला जे […]

भोजपुरी के रवींद्र महेंदर मिसिर का सृजन के विविध आयाम

– डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल साइते केहू भोजपुरिहा होई जे “अंगुरी में डँसले बिया नगिनिया रे, ए ननदी सैंया के जगा द.” आ “सासु मोरा […]

सरधा के अँजुरी : ‘गँवई गंध गुलाब’ के ‘मनबोध मास्टर’

March 18, 2017 Editor 1

– भगवती प्रसाद द्विवेदी आजु जब खेती-किसानी में जीव-जाँगर आ जिनिगी खपावेवाला गरीब किसान खुदकुशी करे खातिर अलचार हो जात बाड़न, त एह निठुर समय […]

प्रगतिशीलता के नाम पर

February 23, 2017 Editor 1

– डॉ ब्रजभूषण मिश्र भाषा सब अइसन भोजपुरी साहित्य में बेसी कविते लिखल जा रहल बा. दोसर-दोसर विधा में लिखे वाला लोग में शायदे केहू […]

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किताबि आ पत्रिका के परिचय – 10

माया माहाठगिनि “माया माहाठगिनि” डॉ. गदाधर सिंह के भोजपुरी ललित निबंध संग्रह हटे, जवना के द्वितीय संस्करण के प्रकाशन सन् 2013 में निलय प्रकाशन, वीर […]

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चक्कर बनाम चस्का

November 26, 2016 Editor 0

(ललित-व्यंग) – डा0 अशोक द्विवेदी आदमी आखिर आदमी हs — अपना मूल सोभाव आ प्रवृत्तियन से जुड़ल-बन्हाइल। मोह-ममता के लस्का आ कुछ कुछ आदत से […]

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पद्मश्री के हकदार भरत शर्मा ‘व्यास’

भोजपुरी के सुप्रसिद्ध गायक भरत शर्मा “व्यास” खातिर पद्मश्री अलंकरण के हम शुरुएसे आग्रही हईं। श्री शर्मा के व्यापक पैमाना पर ख्याति मिलेके आरंभिक वर्ष […]

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देवलास : अदभुत धार्मिक स्‍थल

March 21, 2016 Editor 0

– देवकान्त पाण्डेय उत्‍तर प्रदेश के मऊ जिला के मुहम्‍मदाबाद गोहना तहसील में मऊ शहर से करीब 28 कि.मी. दूर आजमगढ़-मुहम्‍मदाबाद गोहना-घोसी रोड पर स्थित […]

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फागुन बाट ना जोहे

March 16, 2016 Editor 0

– अशोक द्विवेदी फागुन बाट ना जोहे, बेरा प’ खुद हाजिर हो जाला. रउवा रुचेभा ना रुचे, ऊ गुदरवला से बाज ना आवे. एही से […]