Tag: बतकुच्चन

बतकुच्चन – ३९

कहल जाला कि तुलसीदास लिख गइल बानी कि “कूदे फाने तूड़े तान, वाके दुनिया राखे मान”. तुलसीदास का जमाना में लोकतंत्र त रहे ना बाकिर उनुका अन्दाजा रहे कि कलियुग…

बतकुच्चन – ३८

पिछला दिने एगो सम्मानित पाठक के टिप्पणी आइल रहे कि भोजपुरी में श के इस्तेमाल ना होला. उहाँ के भोजपुरी के बढ़िया जानकार हईं आ भोजपुरी पर लगातार शोध करे…

आन्हर कुकुर बतासे भूंके.

(बतकुच्चन – ३७) आन्हर कुकुर बतासे भूंके. भोजपुरी के ई कहाउत पिछला दिने तब याद आ गइल जब देश के एगो बड़का मंत्री इन्टरनेट के सोशल मीडिया का खिलाफ आग…