Tag: भाषा

का कहीं कहाते नइखे, कहला बिना रहातो नइखे

आजुकाल्ह हम बहुते फिकिरमन्द बानी. अँजोरिया चलावत युग बीत गइल बाकिर हम बाकी लोग जइसन ना बन सकनी. ना त हमार कवनो गुट बनल, ना हम कवनो गुट में शामिल…

बतरस आ पाती

अनिल कुमार राय ‘आंजनेय’ भोजपुरी अइसन भाषा ह, जवना पर केहू गुमान करि सकेला. एह भाषा के जेही पढ़ल, जेही सुनल, जेही गुनल ऊहे अगराइल, ऊहे धधाइल, ऊहे सराहल, ऊहे…

भारत के बढ़न्ती ला भारते के भाषा जरूरी काहे ?

भारतीय जीवन के बहुते खास क्षेत्रन में अंग्रेज़ी भाषा के दखल से भारत के बड़हन नुकसान होखत बा. एह दखल का पाछे सबले बड़हन कारण बा कुछ गलतफहमी जवन हमनी…

भोजपुरी पंचायत पत्रिका के दिसम्बर 14 वाला अंक

बावन पेज के पत्रिका, चार पेज विज्ञापन के, चार पेज संपादकीय सामग्री, बाँचल चउवालीस पेज. तरह तरह के तेरह गो संपादक बाकिर प्रूफ आ भाषा के गलतियन के भरमार का…

गाछ ना बिरीछ तहाँ रेंड़ परधान (बतकुच्चन – १३८)

गाछ ना बिरीछ तहाँ रेंड़ परधान. कहे के मतलब कि चँवरा में सिंकिया पहलवानो ताल ठोक सकेला काहे कि ओकरा मालूम बा कि ओकरा के केहू चुनौती देबे ना आई.…

भोजपुरी के विकासमान वर्तमान

– डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल अपना प्रिय अंदाज, मिसिरी के मिठास आ पुरुषार्थ के दमगर आवाज का कारन भोजपुरी शुरुए से आकर्षण के केंद्र में रहल बिया. भाषा निर्भर करेले…

भोजपुरी लिखे पढ़े के कठिनाई आ काट

डा॰ प्रकाश उदय भाषा-विज्ञान में जवना के भाषा कहल जाला, तवना में, जवन कहे के होला, जतना आ जइसे, तवन कहा पाइत ततना आ तइसे, त केहू के ‘आने कि’…