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साहब बुझले पियाज, सहबाइन बुझली अदरख (बतकुच्चन-201)

July 29, 2016 Editor 1

साहब बुझले पियाज, सहबाइन बुझली अदरख. ना ना, बतावे के कवनो जरूरत नइखे कि हम गलत कहाउत कहत बानी. असल कहाउत हमरो मालूम बा बाकिर […]

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बतकुच्चन – ३१

October 19, 2011 OmPrakash Singh 1

आजु जब बतकुच्चन लिखे बइठनी त सोचले रहीं कि आजु तेहो आ तेहा वाली बाति के तहियाएब जहाँ पिछला हफ्ता छोड़ले रहनी. तले चालू टीवी […]

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बतकुच्चन – ३०

October 9, 2011 OmPrakash Singh 1

आजु दू अक्टूबर ह, गांधी बाबा आ लालबहादुर शास्त्री के जन्मदिन. दुनु सादगी से भरल. संजोग से आजु दुर्गापूजा के नवराति के छठवाँ दिन ह. […]

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बतकुच्चन २९

October 3, 2011 OmPrakash Singh 0

आजु जब बतकुच्चन करे बइठनी त मन सरोकार-सरकार-सरकँवासी से सरकत गझिन आ फाँफर पर आ के अटक गइल. सरोकार-सरकार-सरकँवासी पर पहिले बतिया चुकल बानी आ […]

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बतकुच्चन – २८

September 20, 2011 OmPrakash Singh 0

प्रकृति के एगो नियम विज्ञान में पढ़ावल जाला कि ऊ गँवे गँवे सब कुछ के समतल सपाट करे में लागल रहेले, चाहे ऊ पहाड़ होखे […]

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बतकुच्चन – २७

September 12, 2011 OmPrakash Singh 2

बतबनवा के बतकुच्चन कइल दोसर बाति ह आ घुरचियाह के घुरपेंच बतियावल दोसर. बतकुच्चन करे वाला बाते बात में सामने वाला के कुछ बता देबे […]

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बतकुच्चन – २६

September 4, 2011 OmPrakash Singh 0

मानत बानी कि बरसात के मौसम बा. कहीं कम त कहीं बेसी बरखा पड़त बा. बाकिर एकर मतलब ई त ना भइल कि सड़कि के […]

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बतकुच्चन – २५

August 25, 2011 OmPrakash Singh 0

आजु जब हम ई लिख रहल बानी त मन बहुते अँउजाइल बा. तीन दिन से कुछ काम नइखे हो पावत. सगरी धेयान ओहिजा लागल बा […]