का होई जब राउर टहलुआ रउरे के टहलावे लागे ? टहलुआ ऊ जे टहल करे, सेवा करे, राउर छोट मोट काम रउरा कहला पर कइल करे. टहलुआ के स्त्रीलिंग टहलनी होला. सेवा टहल करे खातिर जनता अपना सांसद विधायकन के चुनेले बाकिर चुनाते ऊ लोग चुने वालन के टरकावे लागेला,पूरा पढ़ीं…

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भोजपुरी में एगो कहाउत कहल जाला कि जबरा मारबो करे आ रोवहू ना देव. कुछ कुछ इहे हाल हो गइल बा देश के. सरकार में शामिल लोग हर तरह के करम कुकरम करे में लागल बा बाकिर केहू के ओकरा खिलाफ मुँह नइखे खोले देत. बाबा रामदेव अइसन कोशिश कइलनपूरा पढ़ीं…

हिन्दी में “कल” के जवन मतलब होखे भोजपुरी में त एकर मतलब बिल्कुले अलग होला. कहल जाले कवनो करवट कल नइखे मिलत. अतना बेकल हो गइल बानी एह कलकानी से कि बुझात नइखे कि का करी. कल मतलब कलपूर्जा वाला कल, कल कारखाना वाला कल, आ साथ ही साथ एकरपूरा पढ़ीं…

पिछला दिने जवन कुछ भइल तवन बहुत दुखद रहल. मुंबई पर एक बेर फेरु से आतंकी हमला हो गइल तब बुझाइल कि देस के जनता कतना बेअसरा हो गइल बिया. केहू नइखे जे ओकरा के असरा, आश्रय, पनाह दे सको. जे दे सकत रहे ऊ त खुदे बेअसर हो केपूरा पढ़ीं…

पिछला पखवारे राजनीतिक हिसाब से बहुते हंगामेदार रहल. एह बीच कुछ लोग माल सरका के सरकार से सरकि लिहले त कुछ लोग अपना सरकावे का काबिलियत का चलते सरकार में घुसे के हिसाब किताब लगावे में लागल रहले. अलग बाति बा कि उनकर चलल ना. अब सरकल दू तरह केपूरा पढ़ीं…

आजु जब हम ई बतकुच्चन लिखे बइठल बानी त खबर चल रहल बा कि सुप्रीम कोर्ट करिया धन पर स्पेशल जाँच दल बना दिहले बिया. ओकर कहना बा कि सरकार बिना खरकोंचले कुछ करत नइखे. हँ हँ मानत बानी सुप्रीम कोर्ट के आदेश में खरकोंचल शब्द नइखे बाकिर मतलब तपूरा पढ़ीं…

पिछला पखवारा जब डीजल किरासन आ रसोई गैस के दाम बढ़ावल गइल त लागल कि बिछी डंक मार दिहले होखे. बिछी मरला के दरद के लहर जइसन एह महँगाईयो के लहर उठे लागल बा. आ बिछी के लहर से याद पड़ल कि बरखा का चलते सगरो बिछलहर हो गइल बापूरा पढ़ीं…

पिछला हफ्ता लस्टमानंद जी रामचेला से बतियावत में कह दिहले कि बतकुच्चन वाला ओम प्रकाश भाई से पूछल जाई कि “नाच ना जाने आँगन टेढ़” के सही मतलब का होला. जब से उनुकर लस्टम पस्टम पढ़ले बानी तबहिये से माथा घूम गइल बा. का जाने एह कहाउत के, जवना केपूरा पढ़ीं…

समय त हमेशा बदलत रहेला. ना बदलल त ऊ समय कइसे कहल जाई. बाकिर जब कवनो बदलाव अचके में भा तेजी से हो जाव त आदमी इहे कहे लागेला कि समय बदल गइल बा. देखीं ना जिम्मेदार पद पर बइठल लोग अपना लाग-डाँट का चलते सामने वाला पर अछरंग लगापूरा पढ़ीं…

पुरनका जमाना में रनिवासन में रानी लोग के खटवास-पटवास धरे खातिर एगो अलगे कक्ष भा भवन रहत रहे जवना के कोप भवन कहाव आ जहाँ रुसल आ रिसियाइल रानी लोग जा के खटवास धर लेत रहे. खबर मिलते राजा धावत चहुँप जासु अपना रानी के मनावे खातिर. आजु का जमानापूरा पढ़ीं…

जमाना औचक चहुँप के भौचक करे के चल रहल बा त सोचनी आजु एही चक पर कुछ बकचक कइल जाव. चक कहल जाला जमीन के कवनो बड़का खण्ड के आ एही से जमीन के छोट छोट टुकड़ा मिला के चक बनावल जाला त ओकरा के चकबन्दी कहल जाला. अब चकबन्दीपूरा पढ़ीं…