मुद्दा छींटा गइल – बटोरीं ना त देर हो जाई

– प्रभाकर पाण्डेय चुनाव आ गइल बा. आ का गइल बा, सुरुओ हो गइल बा. कुछ जगहन पर जनता के भागि ओटहिया मसीन में बंद हो गइल बा. चुनाव क…

गोल बनाईं…असली मुद्दन से भटकाईं जिन

– प्रभाकर पाण्डेय “गोपालपुरिया” आजकल लोग पर एगो नया भूत सवार हो गइल बा. जे जहें बा उ उहें बिना सही-गलत के बिचार कइले गोलियावल सुरु क देता, अउर एतने…

सुकुलजी..रउआँ बहुते बेजोड़ बानी जी

– प्रभाकर पाण्डेय “गोपालपुरिया” आजु हमरा सुकुलजी के बहुते इयादि आवता. जब हमरा खूब हँसे के मन करेला त हम सुकुलजी के इयादि क लेनी. सुकुलजी के एइसन-ओइसन मति समझीं…

पेंचर पहुना

– प्रभाकर पाण्डेय “गोपालपुरिया” कल्हिए रमेसर काका एगो टाली के परची दे गइल रहुअन. ऊँखी छिलवावे के रहुए ए से आजु सबेरवें ऊँखी छिलवावे खातिर पूरा गाँव की लोग के…

हो रहल बा भारत निरमान

– प्रभाकर पाण्डेय “गोपालपुरिया” हो रहल बा भारत निरमान, गा रहल बा सब केहू गुनगान, 100 में हो गइने 99 बेइमान, तब्बो आपन देस बहुत महान. हो रहल बा भारत…

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