नीक-जबून-14

– डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल दहेज के बाइ-बाइ बिहार के एगो समाचार काफी चर्चित भइल. अब बिहार में सरकारी नौकरी खातिर चुनल गइल जुवकन के […]

Advertisements

नीक-जबून-13

– डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल बाबूजी के याद कइल अंधविश्वास हटे ? ओइसे त हर साल पितृपक्ष पर अपना तथाकथित विद्वान मित्र लोगन के टिप्पणी […]

हमार जान ह भोजपुरी

April 16, 2018 Editor 0

– डॉ. हरेश्वर राय हमार सान ह हमार पहचान ह भोजपुरी, हमार मतारी ह हमार जान ह भोजपुरी। इहे ह खेत, इहे खरिहान ह इहे […]

होली ह भाई होली ह

February 28, 2018 Editor 0

– तारकेश्वर राय जोगीरा सा रा रा रा … राब गुर त भेटाते नइखे, महंग भइल चाउर ।। बी.पी.एल. के कारड लेके, झनकऽ का करबऽ […]

फगुवा ह फगुवा

February 13, 2018 Editor 0

– तारकेश्वर राय पुरनकी पतईया, फेड़वा गिरावे । जइसे गिरहथ, कवनो खेतवा निरावे ।। नइकी पतइया बदे, जगहा बनावे । जाए के बा एक दिन, […]

सांवरिया आ जइतऽ एक बार

February 13, 2018 Editor 0

गीतकार- लाल बिहारी लाल स्त्री स्वर- सांवरिया आ जइतऽ एक बार अंखियाँ कब से राह निहारे, नैना तरसे हमार सांवरिया आ जइतऽ एक बार…. पानी […]

शिलीमुख के कबिताई

February 2, 2018 Editor 0

– शिलीमुख जेकरा पर बा तोहके नाज ओकरे से बा बिगरत काज ! अँइचा के ऊजर ना लउके आन्हर के सूघर ना लउके सब बाउर, […]

मानिक मोर हेरइलें

January 14, 2018 Editor 0

– आचार्य विद्यानिवास मिश्र भोजपुरी में लिखे के मन बहुते बनवलीं त एकाध कविता लिखलीं, एसे अधिक ना लिखि पवलीं। कान सोचीलें त लागेला जे […]

प्रसुति घर

January 14, 2018 Editor 0

– डॉ. कमल किशोर सिंह सुन्दर सरोबर हो कि कौनो पंक दल-दल , पता केकरा बा कि कहँवा खिली एगो कमल शतदल। कठिन बा ई […]

कहनी-अनकहनी – प्रकाशक का कहनी

November 20, 2017 Editor 0

भोजपुरी साहित्यकार विनोद द्विवेदी के लिखल छोट छोट कहानियन के संग्रह “कहनी-अनकहनी” प्रकाशित हो गइल बा. एह संग्रह के बारे में प्रकाशक के कहनाम एहिजा […]

मईया लछिमी तू मड़ई में अइतू

October 19, 2017 Editor 0

– हरीन्द्र हिमकर मईया लछिमी तू मड़ई में अइतू दुअरिआ पर दिअरी सजइतीं मड़ई में अइतू त चटइ बिछइतीं गाइ का गोबरा से अंगना लिपइतीं […]

बिहंसs दुल्हिन दिया जरावs

October 19, 2017 Editor 0

– हरीन्द्र ‘हिमकर’ बिहंसs दुल्हिन दिया जरावs कुच -कुच रात अन्हरिया हे। नेहिया के बाती उसकावs बिहंसो गांव नगरिया हे। तन के दिअरी,धन के दिअरी, […]

दुमुंहा

October 16, 2017 Editor 0

– जयशंकर प्रसाद द्विवेदी ललछौंहा कवनों फोड़ा टीसत रहे कुलबुलात रहलें चोरी चुपके परजीवी कृमि चीरा लगते अंउजाइल बहरियाए लगलें । तीखर घामे दँवकल भीत […]