कृष्णानन्द कृष्ण रिटायर्ड़ भइला का बादो दीनदयाल जी के दिनचर्या में कवनो बदलाव ना आइल रहे. उहे पूजा-पाठ, सध्या-वन्दन आ खाली समय में कवनो ना कवनो विद्यार्शी के विद्यादान. उनकर इ मान्यता रहे कि दुनिया में सबसे उत्तम दान विद्यादान होला. आदमी के जीवन में इहे एगो चीज बा जवनपूरा पढ़ीं…

देरी से मिलल खबर आइल बा कि भोजपुरी के प्रतिष्ठित कथाकार-कवि कृष्णानंद कृष्ण जी अब हमनी का बीच ना रहलीं. उहाँके निधन तीन दिन पहिले मंगल का दिने बंगलौर में हो गइल. ई खबर डॉ सतीशराज पुष्करणा जी से वरिष्ठ साहित्यकार भगवती प्रसाद द्विवेदी जी के मीलल आ उहाँ सेपूरा पढ़ीं…

डॉ. जयकान्त सिंह ‘जय’ हमरा समझ से संस्कृत के देवभाषा एह से कहल गइल कि एकरा में रचल प्राय: हर कविता चाहे श्लोक समस्त सृष्टि खातिर जीवन मंत्र के काम करेला. नमूना के रूप में एगो श्लोक देखीं – ” अमन्त्रमक्षरं नास्ति, नास्ति मूलं वनौषधम्. अयोग्यो पुरुषो नास्ति, योजकस्त्र दुर्लभ:.पूरा पढ़ीं…

डॉ अशोक द्विवेदी एगो जमाना रहे कि ‘पाती’ (चिट्ठी) शुभ-अशुभ, सुख-दुख का सनेस के सबसे बड़ माध्यम रहे। बैरन, पोस्टकार्ड, अन्तर्देशी आ लिफाफा में लोग नेह-छोह, प्रेम-विरह, चिन्ता-फिकिर, दशा-दिशा आ परिस्थिति-परिवेश पर अपना हिरदया के उद्गार लिखि के भेजे । कबो-कबो त ‘पाती’ जेतना लिखनिहार का लोर से ना भींजे,पूरा पढ़ीं…

दू दिन पहिले विमल जी के पत्रिका सँझवत के जानकारी आ सामग्री मिलल. एने कई एक महीना से हम थाकल महसूसत बानी जवना चलते अब अँजोरिया भा एकरा दोसरा साईटन पर नया सामग्री नइखीं दे पावत. थाकल मन एहू चलते बा कि भोजपुरी में लंगड़ी गईया के अलगे बथान केपूरा पढ़ीं…

जे भोजपुरी में, भोजपुरी खातिर, बिना लोभ-लालच आ मान-प्रतिष्ठा के परवाह कइले बरिसन से चुपचाप रचनात्मक काम कर रहल बा आ कइले जा रहल बा, ओके नजरअन्दाज कइ के, एक-दूसरा के टँगरी खींचे वाला ई कथित भोजपुरी-हित चिंतक मठाधीशे लोग बा। हमरा त चिंता होला कि भोजपुरी के कबो अगर मान्यता मिल गइल आ ओकरा नाँव पर पढ़े-पढ़ावे भा पुरस्कार-सम्मान के इन्तजाम होइयो गइल त ओकरा बाद के स्थिति केतना बिद्रूप आ भयंकर होई? तब त एक दोसरा क कपार फोरे में ना हाथ लउकी, ना ढेला। पूरा पढ़ीं…

लोकरंजन आ सांस्कृतिक गीत-गवनई के बढ़ावा देबे खातिर पाती कला मंच आ भोजपुरी दिशाबोध के पत्रिका पाती का ओर से नयी दिल्ली के दीनदयाल मार्ग, आईटीओ, पर स्थित राजेन्द्र भवन ऑडिटोरियम में शनिचर 15 सितम्बर का दिने साँझ पाँच बजे से साढ़े आठ बजे ले एगो सांस्कृतिक आयोजन राखल गइलपूरा पढ़ीं…

दिल्ली के संसद मार्ग पर होई भोजपुरिया जुटान भोजपुरी के संवैधानिक मान्यता आ आठवीं अनुसूची में शामिल करावे खातिर पूर्वांचल एकता मंच, भोजपुरी जन जागरण अभियान, अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन, अखिल भारतीय भोजपुरी लेखक संघ आ रंगश्री के संयुक्त तत्वावधान में 7अगस्त, 2018 दिन मंगलवार के विशाल धरना प्रदर्शनपूरा पढ़ीं…

“हँसी, ठिठोली, बोली आ बेवहार गजब बा, भोली सूरत, रहन-सहन, तेवहार गजब बा” भोजपुरी के मूर्धन्य कवि अउऱ गायक संगीत सुभाष जी के एह पंक्तियन का साथे कार्यक्रम के समहुत भइल आ एकरा साथे-साथ शशि अनाड़ी, अजय प्रकाश तिवारी, अउर विनोद गिरी के गावल गानो के श्रोता लोग के भरपूरपूरा पढ़ीं…

24 फरवरी के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, मैक्स मुलर मार्ग, नई दिल्ली में विश्व भोजपुरी सम्मेलन के राष्ट्रीय कार्यकारणी के बइठक आ अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर विचार गोष्ठी भइल. हिन्दी में भेजल एह बइठक के रपट के भोजपुरी अनुवाद नीचे दीहल जा रहल बा. भोजपुरी के संस्थन के अतना फुरसत नापूरा पढ़ीं…

– डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल बड़की बलिहार आ नदिया के पार आजुए रामेंद्र के फोन आइल रहल हा कि बड़की बलिहार गइल रहलीं हा. नाँव सुनते ‘नदिया के पार’ फिल्म के याद आ गइल. एह सुपरहिट फिल्म के कहानी ओही गाँव के हटे. लोग कहेला कि एकदम साँच. केशव प्रसादपूरा पढ़ीं…