Tag: भोजपुरी पत्रिका

प्रेम में डूबल औरत अउर हम : दू गो कविता

– अल्पना मिश्र (1) प्रेम में डूबल औरत प्रेम में डूबल औरत एक-एक पल-छिन सहेजत-सम्हारत रहेले। ‘कइसे उठाईं ई ‘छन’ कहाँ धरीं जतन से…’ इहे सोच-सोच के कई बरिस ले…

दइब टेढ़ भइले करमवो बा फूटल : गजल

– रामयश अविकल चलीं ई सबुर के बन्हल-बान्ह टूटल कमाये बदे आज घर-गाँव छूटल। मिलल मार गारी, मजूरी का बदला सरेआम अब आबरू जाय लूटल। भवन तीन-महला शहर में बा…

भोजपुरी-वर्तनी के आधार

– स्व. आचार्य विश्वनाथ सिंह (ई दस्तावेजी आलेख एह खातिर दिहल जाता कि भोजपुरी लिखे-पढे़े में लोगन के सहायक-होखो) भोजपुरी भाषा में उच्च कोटि के साहित्य-रचने करे खातिर ना, ओकर…

लोकजीवन के ‘बढ़नी’ आ ‘बढ़ावन’

– डा॰ अशोक द्विवेदी ‘लोक’ के बतिये निराली बा, आदर-निरादर, उपेक्षा-तिरस्कार सब के व्यक्त करे क ‘टोन’ आ तरीका अलगा बा. हम काल्हु अपना एगो मित्र किहाँ गइल रहलीं, उहाँ…

हिंदी आ अंगरेजी के छौंक वाली भोजपुरी पत्रिका हेलो भोजपुरी

भोजपुरी के नियमित रूप से प्रकाशित हो रहल पत्रिकन में खास जगहा बना लिहले बिया हेलो भोजपुरी पत्रिका. एकर जुलाई अंक मिलल त देख पढ़ के मन खुश हो गइल.…

‘प्रेम-कविता’ पर केन्द्रित पाती के अंक

कुछ साथी-सहयोगियन का सुझाव / निहोरा पर जब ‘प्रेम’ पर केन्द्रित कविता पर अंक के बिचार बनल त हम जल्दी-जल्दी भोजपुरी कवियन से संपर्क सधनी. ओइसे त प्रतिक्रिया उछाहे भरल…

‘हेलो भोजपुरी’ पत्रिका के विमोचन

– ओमप्रकाश अमृतांशु अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन के २५वाँ राष्ट्रीय अधिवेशन में ‘हेलो भोजपुरी’ पत्रिका के विमोचन बिहार के पुर्व उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के हाथे भइल. एह…

गीत

(पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से – 23वी प्रस्तुति) – रिपुसूदन श्रीवास्तव जिन्दगी हऽ कि रूई के बादर हवे, एगो ओढ़े बिछावे के चादर हवे. जवना घर में…

‘गंगा-तरंगिनी’ (पुस्तक समीक्षा)

जिये-जियावे क सहूर सिखावत अमानुस के मानुस-मूल्य देबे वाली ‘गंगा-तरंगिनी’ ‘गंगा-तरंगिनी’ (काव्य-कथा) अभिधा प्रकाशन, मुजफ्फरपुर. मूल्य – पचास रुपये. प्रथम संस्करण. कवि – रविकेश मिश्र (पाती के अंक 62-63 (जनवरी…

धर्म: बदलत रूप बिगड़त माहौल

(पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से – 21वी प्रस्तुति) – सुशील कुमार तिवारी जइसन कि धर्म ग्रंथन में कहल गइल बा ‘धरेतिसः धर्मः’। माने कि देश अउर काल…