अंग्रेजी के हुकुमत पर

अभयकृष्ण त्रिपाठी अंग्रेजी के हुकुमत पर कलम चलावत बानी रेड, माई हो गइली ममी बाबूजी के करत बानी डेड।। अतना कइला पर भी अबही ले हम बैकवर्ड बानी, ठेकेदारन के…

जिनगी बेकार लागेला

– मनिर आलम हमर जिनगी हमरे अजब लागेला. आंख में लोर के सैलाब लागेला. दुनिया में तोहरा जैसन कोई नइखे. फूल जैसन चेहरा गुलाब लागेला. का जरुरत बा तोहरा पर्दा…

उन्हुकर उदासी

– भगवती प्रसाद द्विवेदी हमार नाँव सुनिके बड़ा ललक से आइल रहले ऊ मिले बाकिर भेंटात कहीं कि हो गइले उदास. शहर के हमरा खँड़हरनुमा खपड़पोश घर में नजर ना…

देसी ना, हमके विदेशी चाहीं …

– शैलेश मिश्र अगर हम सानिया मिर्ज़ा बानी त देसी ना, हमके विदेशी चाहीं … अरब के संख्या में हिन्दुस्तानी, बियाह करेके पाकिस्तानी चाहीं. अगर हम सोनिया गाँधी बानी त…

चिट्ठी

– डा॰अशोक द्विवेदी हम तोहके कइसे लिखीं? कइसे लिखीं कि बहुते खुश बानी इहाँ हम होके बिलग तोहन लोग से… हर घड़ी छेदत-बीन्हत रहेला इहवों हमके गाँव इयाद परावत रहेला…

पापी हो गइल मनवा

– अभय कृष्ण त्रिपाठी पापी हो गइल मनवा कइसे करीं राम भजनवा, प्रभुजी मोरे कइसे करीं राम भजनवा.. आइल बानी द्वार तिहारे, मन ही मन में रजनी पुकारे, पुलकित होवे…

Scroll Up