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Author: Editor

कइसे कहीं ए भइया, कि फगुवा आवऽता

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यादवो जी के दिन फिरल

बरीसन से रितीज होखे के राह तिकवत भोजपुरी फिलिम “यादव पान भंडार” अब रिलीज होखे का लाइन में लाग गइल बा. आ एकरा साथही मनोज तिवारी लमहर दिन बाद सिनेमा का पर्दा पर लउकिहें. पीआरओ रंजन सिन्हा के भेजत एगो पोस्ट से एह बात के जानकारी मिलल बा कि भोजपुरी सिनेमा के तिसरका दौर के जनक आ लोकगायक से लोकअभिनेता आ ओकरो बाद लोक प्रतिनिधि बन गइल मनोज तिवारी के भोजपुरी फिलिम ‘यादव पान भंडार’ के रिलीज करे के तिय़ारी शुरु हो गइल बा. श्रीकृष्णा क्रियेशन्स के बैनर तर बनल एह फिलिम के पहिलका झलकी जारी हो गइल बा...

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ढील देके चना के झाड़ प चढ़ावल – बतंगड़ 73

– ओ. पी. सिंह एह घरी देश के सगरी खुरचाली एकजुट होखे लागल बाड़ें काहें कि ओहनी के मालूम हो गइल बा कि अगर एकवटब सँ ना त बिला जाए के पड़ी. भारत तेरे टुकड़े होंगे – इंशा अल्लाह, इंशा अल्लाह कहे वालन का साथ देश के बड़हन गोल रहि चुकल कांग्रेस खुलेआम मैदान में उतरि आइल बिया. ओकरा एह बात के इचिको चिन्ता नइखे के ओकरा खुरचालि से देश के कतना नुकसान होखत बा आ कतना नुकसान होखे जा रहल बा. खोज खोज के बवाल करावल जा रहल बा आ एह खुरचालि में टुकड़खोर मीडियो आपन जी जान...

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फगुवा ह फगुवा

– तारकेश्वर राय पुरनकी पतईया, फेड़वा गिरावे । जइसे गिरहथ, कवनो खेतवा निरावे ।। नइकी पतइया बदे, जगहा बनावे । जाए के बा एक दिन, इहे समझावे ।। चइती फसलिया, बा गदराइल । लागत फगुनवां, बा नियराइल ।। सरसो पियरकी से, खेतवा रंगाइल । अमवाँ मउराइल, महुवा मोजराइल ।। चारु ओर सुनाता, कोइलिया के बोली । भइया त खुश बान, देख भउजी के डोली ।। ढोल मृदंग के, धमाल खोरी खोरी । उड़ता रंग, अबीर, चारु ओरी ।। फगुवा में भंगिया के, कदर बढ़ि जाला । भख के बुढ़वो, जवान होइ जाला ।। मस्ती में, देखीं सभे बाटे रंगाइल...

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सांवरिया आ जइतऽ एक बार

गीतकार- लाल बिहारी लाल स्त्री स्वर- सांवरिया आ जइतऽ एक बार अंखियाँ कब से राह निहारे, नैना तरसे हमार सांवरिया आ जइतऽ एक बार…. पानी बिन मछरी के जइसे, तड़पी रोज पिया तोहरे याद मे बेसुध होके, भटकी रोज पिया दिने-दिन प्यास बढ़त बा, लागे ना जीया हमार सांवरिया आ जइतऽ एक बार…. भूल भइल का हमसे राजा, आ के द तू बता कवना बात के ऐ तू राजा, देत बारऽ सजा प्रीत के रीत में दर–दर भटकी, सुन ल हमरो गुहार सांवरिया आ जइतऽ एक बार…. आके पुरा जा लाल के लालसा, कहेले लाल बिहारी अब ना अइसे...

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ना ओनिये के ना एनिये के – बतंगड़ 72

– ओ. पी. सिंह अबकी के बजट का बाद फेरु इयाद आ गइल भोजपुरी कवि अशोक द्विवेदी के एगो कविता के अंश – बीच के अदिमी ससुरा, ना ओनिये के ना एनिये के. कूल्हि ठसक आ इमानदारी केने दो घुसुर गइल बा. कविता लमहर बा आ पूरा कविता एहिजा दिहला के ना त कवनो जरुरत बा ना जगहा. बस इहे बतावे के बा कि बीच के आदमी हमेशा से पिसात आइल बा. ऊपर वाला का लगे सब कुछ बा जवना से ऊ आपन हर हालात सम्हारि सकेला. नीचे के आदमी जतने में बा ओतने में खुश बा. आजु क...

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मारि देब गोली, केहू ना बोली ! – बतंगड़ 71

– ओ. पी. सिंह खबरदार, जे एह देश में भारत माता के जयकारा लगवल त ठीक ना होखी. मार देब गोली आ केहू ना बोली ! काहे कि गोली मारे से पहिले पाकिस्तान जिन्दाबाद के नारा लगा देब आ एह नारा का बाद ना त कवनो राजनीतिक गोल बोली, ना कवनो मीडिया, ना अदालत, ना कोर्ट कचहरी वाला. सभे अनजान बन जाई हमरा मजहब से. हमरा के शान्तिदूत, भटकल नौजवान, असामाजिक तत्व आ पता ना अउर कवना-कवना नाम से बोलावल जाई. बाकिर केहू क हिम्मत ना होखी कि हमरा मजहब के नाम ले लेव. देश में मोदी के सरकार...

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आपन धियवा नीमन रहीत त बिरान पारित गारी ! – बतंगड़ 70

– ओ. पी. सिंह शुक का दिने जवन भइल तवन होखल ना चाहत रहुवे. सुप्रीम कोर्ट के पचीस गो में से चार गो जज कायदा का खिलाफ जा के बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस क के अपना मुख्य न्यायाधीश प सवाल उठा दिहलें. एह लोग के शिकायत एह बाति के बा कि कुछ केस ओह लोग के ना दे के दोसरा जजन के काहे दीहल जा रहल बा. मानो ओह केसन से कुछ खास फायदा होखे के उमेद रहल होखे आ ऊ फायदा एह लोग के ना हो के दोसरा के काहे होखे दीहल गइल. लोअर कोर्टन में होखत भठियरपन त...

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शिलीमुख के कबिताई

– शिलीमुख जेकरा पर बा तोहके नाज ओकरे से बा बिगरत काज ! अँइचा के ऊजर ना लउके आन्हर के सूघर ना लउके सब बाउर, नीमन कुछ नाहीं ओकरा के बस गद्दी चाहीं जाति-बरग में भेद बढ़ा के सुबिधा-शक्ति-अफीम चटा के जतना चाही लूटी खाई खुरचुन के परसाद खियाई। पुहुत दर पुहुत ओकरे राज! गद्दी छिनते भइल नराज !! रहि- रहि रोज रसाई छेरे फइलावत दुर्गन्ध घनेरे धिक् इरिखा, धिक् धिक् अन्हरउटी धिक् ओकर दूमुँहाँ कसउटी खन तोला ,खन माशा- रत्ती अगरु-धुआँ के बारे बत्ती टुकी -टुकी में तन्त्र बाँटि के बार जोगावे माथ काटि के चिरइन पर जस...

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पद्मश्री डा0 कृष्ण बिहारी मिश्र

जन्म: 01 जुलाई 1936, बलिया जिला के बलिहार गाँव में। श्रीमती बबुना देवी आ श्री घनश्याम मिश्र क एकलौता पुत्र । शिक्षा: प्राथमिक शिक्षा गाँव में, माध्यमिक गोरखपुर में आ उच्च शिक्षा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी में । ‘‘नवजागरण के सन्दर्भ में हिन्दी पत्रकारिता का अनुशीलन’’ विषय पर शोध आ डाक्टरेट के उपाधि। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता आ संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से डी0लिट्0 के मानद उपाधि। सेवा: अध्यापन वृत्ति से 30 जून 1996 के सेवानिवृत्ति। देश के कई विश्वविद्यालययन आ सरकारी, गैरसरकारी विद्या संस्थानन में सक्रिय भूमिका अउरी राष्ट्रीय, अन्तरराष्ट्रीय बिचार गोष्ठियन में भागीदारी। प्रकाशित पुस्तक: ‘हिन्दी पत्रकारिता :...

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