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Author: Editor

कहनी-अनकहनी – प्रकाशक का कहनी

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पाण्डेय कपिल जी के निधन प स्मृति – सभा के आयोजन

भोजपुरी साहित्य के साधक साहित्यकार पाण्डेय कपिल जी के निधन प काल्ह वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर भोजपुरी विभाग में स्मृति – सभा के आयोजन कइल गइल जवना के अध्यक्षता पूर्व भोजपुरी विभागाध्यक्ष आ भोजपुरी – हिंदी के वरिष्ठ विद्वान डॉ.गदाधर सिंह जी कइनी । पाण्डेय कपिल स्मृति – सभा के प्रारम्भ में संचालनकर्ता वर्तमान विभागाध्यक्ष नीरज सिंह स्व.कपिल जी के व्यक्तित्व आ कृतित्व प विस्तार से प्रकाश डललन। कार्यक्रम में उपस्थित पूर्व भोजपुरी विभागाध्यक्ष डॉ.रविंद्रनाथ राय आ डॉ. अयोध्या प्रसाद उपाध्याय , हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. योगेन्द्र पाठक , प्रो.बलराज ठाकुर आदि विद्वान लोग स्व. कपिल जी के...

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हमहुँ देवता के परसाद चढ़इतीं – बतंगड़ 60

– ओ. पी. सिंह पिछला हफ्ता तीन चार गो अइसन बाति सामने आइल जवना प बतंगड़ के पूरा गुंजाइश रहल. देह से अपाहिज बाकिर दिमाग से चौकन्ना आ तेज मशहूर वैज्ञानिक स्टीफेन हॉकिन्स कहलन कि हो सकेला आगा चलि के अइसन रोबोट बनि जाव जवन आदमी प हावी हो जाव. पता ना ऊ ई बाति का सोच के कहलन. कुछ दिन पहिलहीं खबर आइल रहल कि रोबोट के नागरिकता देबे वाला पहिला देश हो गइल बा सउदी अरब. सउदी सरकार एगो जनानी रोबोट के अपना देश के नागरिकता दे दिहले बावे. सबसे खात बाति ई रहल कि एह जनानी...

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चुप रहऽ, अदालत का खिलाफ मत बोलऽ – बतंगड़ 59

– ओ. पी. सिंह याद करावल अब जरुरी हो गइल बा कि अदालत का खिलाफ कुछ बोलल नुकसानदायक हो सकेला. देखले बानी कि बड़हन-बड़हन अपराधी कतना आराम से कहेलें कि उनुका देश के अदालत प पूरा भरोसा बा. निर्दोष लोग भरोसा करे चाहे मत करे ओही लोग का नाम प बहुते अपराधी छूट जालें. काहें कि हमहन के अदालत ई मान के चलेले कि चाहे हजार गो अपराधी छूट जासु बाकिर कवनो निर्दोष के सजा ना होखे के चाहीं. अब अइसना अदालत खातिर आदर के भाव ना राखल गलत कहाई आ अदालत एह बात प बहुते कड़ा रुख राखेले...

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रचनात्मक आन्दोलन के लौ भोजपुरी भासा के हर दौर में बरल बा

– सौरभ पाण्डेय भोजपुरी के भासाई तागत भर ना, बलुक एकर आजु ले बनल रहला के तागत प केहू निकहे से सोचे लागो आ अंदाजे लागो, त ऊ एह बात प ढेर अचकचाई जे ई भासा कतना काबिल, आ कतना लोचगर भासा हऽ ! भासा के तौर प भोजपुरी लोचगर बिया तबे ई आजुओ ले बनल बिया। एह कहनाम से एइजा दू बात जाहिर होता। एक, जे ई निकहा पुरान भासाई परम्परा के जियत-सम्हारत भासा हऽ। दोसर, एह भासा के जीवनी-शक्ती निकहा दमगर बिया। ई भासा कइसन बोलनिहारन के भासा हऽ, ई भोजपुरिहा समाज के भा एह जवार-समाज से...

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बुड़बक बुझावे, से मरद – बतंगड़ 58

– ओ. पी. सिंह पिछला लेकसभा में चुनाव हरला का बाद कांग्रेस के हालात अइसन बनि गइल बा कि ऊ चुनाव जीते के फार्मूला नगरी-नगरी द्वारे-द्वारे खोजत चलत बिया. ओकरा लागत बा कि सगरी राज मोदी के स्टाइल में लुकाइल बा आ ओकर नकल करि के मोदी के मात दीहल जा सकेला. अब ओकरा के ई के समुझावे कि नकलो खातिर अकल के जरूरत पड़ेला. ओकर युवराज अब अधबूढ़ हो चलल बाड़ें आ मोदी के मुकाबिला करे ला उहो सोचत बाड़न कि बाँड़े रहे के चाहीं. मोदी के देखा देखी उहो एगो हीरोइन खोज ले आइल बाड़न आ उनुके...

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मईया लछिमी तू मड़ई में अइतू

– हरीन्द्र हिमकर मईया लछिमी तू मड़ई में अइतू दुअरिआ पर दिअरी सजइतीं मड़ई में अइतू त चटइ बिछइतीं गाइ का गोबरा से अंगना लिपइतीं मूज का रसरिआ में आम का पतईयन से झलर-मलर झलर-मलर झलरी लगइतीं। मईया लछिमी जो अंखिया घुमइतू त राह में अंजोरिआ बिछइतीं हरदी चउरवा से चउका बनउतीं दूब -धान पंखुरी से चउका सजउतीं केरा का पतई पर मरचा के चिउरा आ दही गुड़ परसी के जेवना जेंवंवती। मईया एकबेर जूठन गिरइतू त असरा के कलसा सजइतीं एक बेर अइतू त लइतीं बतासा बजवइतीं दुअरा पर पिपुही आ तासा मनफेरवट तोहरो नू होइत हे माई...

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बिहंसs दुल्हिन दिया जरावs

– हरीन्द्र ‘हिमकर’ बिहंसs दुल्हिन दिया जरावs कुच -कुच रात अन्हरिया हे। नेहिया के बाती उसकावs बिहंसो गांव नगरिया हे। तन के दिअरी,धन के दिअरी, मन से पुलक-उजास भरs गहन अन्हरिया परे पराई जन -जन में विश्वास भरs हिय के जोत जगावs सगरो फाटो बादल करिया हे। अमर जोत फइलावs दुल्हिन अमरित दिअरी में ढारs झुग्गी, महल, अटारी चमके समता के दिअरी बारs जमकल जहां अन्हरिया बाटे उहंवे कर अंजोरिया हे। अंचरा में मत जोत लुकावs दुलहिन जोत लुटावs तू कन-कन में फइलो उजियारा सुख सगरो पसरावs तू घर -घर दीप जरी मन हुलसी जग-मग करी बहुरिया हे। हरीन्द्र...

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चचवा के चाल घर बिगाड़ दिहलसि – बतंगड़ 57

– ओ. पी. सिंह अपना के जनम का गलती से हिन्दू बाकिर संस्कार से इस्लामी बतावे वाला चचवा के चाल लागत बा कामयाब हो गइल. हिन्दू बहुल हिन्दुस्तान के एही चलते नाम रखलसि इण्डिया, भारत त बस बुड़बक बनावे ला लिखाइल-कहाइल. राज चलवलसि गवर्नमेंट आफ इण्डिया. देश के बँटवारा मजहबी आधार पर होखे के समझौता रहला का बादो चचवा एह देश के सेकुलर बनवावे का जिद प अड़ गइल आ अपना चालबाज लोकप्रियता का चलते मनवाइओ लिहलसि कि मुसलमान एहिजे रहीहें आ उनुका अतना अधिकार मिली जतना ला हिन्दू तरस के रहि जइहें. आ एही चालबाजी के नमूना बनल...

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दुमुंहा

– जयशंकर प्रसाद द्विवेदी ललछौंहा कवनों फोड़ा टीसत रहे कुलबुलात रहलें चोरी चुपके परजीवी कृमि चीरा लगते अंउजाइल बहरियाए लगलें । तीखर घामे दँवकल भीत जुड़ाले पेटे पेट अदहन अस भइल बात कबो ना सिराले मुँह से लार अस टपक जाले । पजरे क परतीत साँच ना होले मनई बहरूपिया अस स्वांग रचेला समने अलगा पाछे अलगा बांचेला महाभारत । दूभर होला मीठ बोलवा के चिन्हल जानल पहिचान्हल डोड़हा लेखा दुमुंहा कीरा कब डँसी आ केहर डँसी पता ना चले...

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