रजवा के बेटिया भइली कंगरेसिया हो रामा, चोलिया पर. चोलिया पर जय हिन्द लिखवली हो रामा चोलिया पर. जानत बानी कि फगुआ के मौसम ह आ ई गीत चइता के ह. बाकिर माहौल कुछ अइसने बन गइल बा आ चरचा में देश के दू गो अइसन मॉडल आ गइल बाड़ीपूरा पढ़ीं…

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अबकी के चुनाव एकहत्तर जइसन होखे वाला बा जब इन्दिरा कांगेस के टिकट प खड़ा बिजली के खंभा ले जीत गइल रहले. बाकिर सोचे वाली बात होखी कि का भाजपा का लगे अइसन बेंबत बा जे उ अपना उमीदवारन के देश के हर राज्य से जीता ले जाव? ई एगोपूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय परहेज के माने होला कि नुकसान करे वाला अउर जउन चीज बादी होखे तउना के सेवन ना कइल अउर सबूर राखल, दोष, पाप कइला अउर खराब आदत से बचल. एही के लोग परहेज कहेला आ जे नियम धरम से रहेला, परहेज करे वाला होला, ओकरा के लोगपूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय जाड़ के दिन रामचेला आ बाबा लस्टमानंद बइठल कौड़ा तापत रहले. बात चलल देश के हाल पर आ चलत-चलत चलि आइल हमनी भारत के लोग का शौक पर. बाबा पूछले कि ‘जानऽ तारऽ, अपना देश के लोग के सबसे बड़हन शौख का ह ? केहु कुछ बतावल,पूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय रामचेला बाबा लस्टमानंद से पूछले कि राजनीति में भ्रष्टाचार के अलावा आउर का होला? बाबा मुस्किअइले आ कहले भ्रष्टाचार त राजनीति के फल होला ओकरा में शामिल ना होला. राजनीति के आपन एगो संसार होला आ ओह में रहेला में इज्जत आ पांक. पांक आ इज्जत जब-जबपूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय जबसे आम आदमी राजनीति के अंगूर हो गइल तबसे राजनीति के नशा लोग पर अइसन छा गइल बा कि जेकरा देखऽ ऊ पी एम से नीचे के सपने नइखे देखत. लोग के चैन नइखे. ना केहु के भूखि लागऽता ना पियास. ना ठंडा के परवाह ना शीतलहरीपूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय बाबा लस्टमानंद के घर के सामने तिवारी जी के घर बा. बाबाजी गाय भईंस पोसले बाड़े आ पोता होला के आस में दूध बेच दे तारे. पोती लोग के दूध ना पियइहें. तिवराइन कहेली कि ‘का जाने कहां से ई लछमी जी लोग दउरल-दउरल चल आवऽता लोग.’पूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय रामचेला आज सबेरे बाबा लस्टमानंद के लगे अइले आ आवते बोलले, बाबा हो, अबकी चुनाव में त कांग्रेस डूब गइल. अब केंद्रो में भाजपा के पक्का चांस बा. उनका पहिले गांव के कई लोग बाबा से इहे कहले रहे. इहां तकले कि बाबा के बेटवों कहऽतारे सँ.पूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय बाबा लस्टमानंद अपना पोती शुभी के सवाल से बड़ा हरान रहेले. अब काल्हुए के बात ह, हठात आ के पूछलसि, “बाबा अपना देश के सोना के चिरई कहां चल गइल?” अब से का कहल जाउ? सवाल कठिन आ उत्तर आउर अझुराह ? कहल जाउ कि उड़ि केपूरा पढ़ीं…

मोहम्मद खलील के गायकी के मादकता, मिठास आ ओकर मांसलता वाली महक लोग का मन में अबहियों ताजा बा. उनकर मिसरी जइसन मीठ आ खनकदार आवाज़ आजुओ मन में जस के तस बसल बावे. काहे कि “प्रीति में ना धोखाधड़ी, प्यार में ना झांसा, प्रीति करीं अइसे जइसे कटहर कपूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय बाबा लस्टमानंद आ रामचेला दुर्गा पूजा देखे कोलकाता गइले. उहां मिडल क्लास में पढ़े वाला उनकर नाती जब पूछलस कि बाबा हो ‘सावन में लग गई आग’ गीत के माने का होई. जवन पानी से पियास मेट जाला चाहे आग बुता जाला ऊ पानी कइसे आगि लगापूरा पढ़ीं…